कश्मीर की हिंसा रोकने और शांति बहाली में मदद के लिए जो भी तैयार होगा, उससे मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बातचीत की पहल को सहर्ष स्वीकार करने की प्रतिबद्धता दिखाई है ताकि बातचीत के जरिये घाटी की समस्या सुलझाई जा सके।
जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री ने रविवार को स्पष्ट किया कि मसले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए यदि अलगाववादी भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं तो उन्हें कोई एतराज नहीं होगा।
शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद रविवार को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वार्ता प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक सौहार्दपूर्ण माहौल जरूरी है और साथ ही हिंसा भड़काने के लिए युवाओं को उकसाने वाले मुट्ठी भर लोगों को भी रोकना होगा जो सुरक्षा बल के शिविरों पर ‘घेराव और हमले’ की नीति पर चल रहे हैं।
'वाजपेयी सरकार की तरह सभी पक्षों से हो वार्ता'
प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
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उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वार्ता प्रक्रिया की रूपरेखा पहले से बेहतर बनानी होगी, जिनमें पूर्ववर्ती केंद्र सरकारें वार्ताकारों को नियुक्त करती थीं और कार्यकारिणी समूह बना देती थीं।
उन्होंने कहा कि इसके बजाय वार्ता सूत्र को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल से जोड़ने की जरूरत है जिन्होंने बाहरी पक्ष के तौर पर पाकिस्तान के साथ और आंतरिक पक्ष के रूप में हुर्रियत एवं हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के साथ भी बातचीत शुरू करने के ‘बहुत गंभीर प्रयास’ किए थे।
कश्मीर हिंसा में 68 लोगों के मारे जाने के बाद वहां पिछले 51 दिनों से जारी अस्थिरता के दौर के बीच महबूबा ने कहा, ‘मैंने अपनी चिंताएं प्रधानमंत्री को भी बताई कि यहां के लोगों का वार्ता प्रक्रिया से विश्वास उठ गया है। लिहाजा एक संस्था के तौर पर पहली वार्ता प्रक्रिया बहाल करना जरूरी हो गया है।’
गृहमंत्री राजनाथ ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई
प्रेस वार्ता के दौरान महबूबा मुफ्ती और राजनाथ सिंह
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस समस्या के कुछ हद तक हल के लिए वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा, ‘इस प्रक्रिया में हमें सबसे भरोसेमंद लोगों को शामिल करना होगा जो दूसरे पक्षों के सामने प्रभावी तरीके से अपनी बात रख सकें।
कश्मीर मसले के हल में जो कोई पक्ष दिलचस्पी रखता है, उन्हें समझना होगा कि इसका हल चंद दिनों या महीनों में नहीं निकलने वाला है।’ उन्होंने कहा, ‘क्या हम मसले का हल निकलने तक लोगों की जिंदगी को ऐसे ही बेहाल बनाए रखेंगे? क्या हम चाहते हैं कि हमारे बच्चों की हत्याएं होती रहें? क्या हम चाहते हैं कि वे बदले की कार्रवाई में कुछ भी करते रहें और जख्मी होते रहें? ये कुछ ऐसे मर्म हैं जिन पर हर किसी को सोचना चाहिए।’