शाहपुरकंडी बांध के पानी से मिलेगा 25 हजार किसानों को लाभ, 1150 क्यूसेक पानी देने का प्रावधान
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। केंद्र सरकार के आम बजट में जिला सांबा के लिए दो सौगात मिली हैं। शाहपुरकंडी बैराज का निर्माण पूरा होने से जिले की 32173 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसके साथ ही संस्कृति संरक्षण के लिए डुग्गरधानी का विकास होगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने संसद में पेश बजट में जिक्र किया कि वर्ष 2024-25 में ही शाहपुरकंडी बैराज प्रौजेक्ट पूरा हो जाएगा। इससे जम्मू-कश्मीर के बड़े भू भाग को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। इसका बड़ा लाभ सांबा जिले के 25 हजार किसानों को मिलेगा। जिले में धान और गेहूं की खेती मुख्य रूप से होती है। धान के सीजन में बिजली कटौती, तो गेहूं के सीजन में नहरों पानी नहीं छोड़े जाने के चलते किसानों को फसलों की सिंचाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। सांबा जिले के लिए 1150 क्यूसेक पानी देने का प्रावधान किया गया है।
बजट में सिंचाई सुविधा के प्रावधान को लेकर किसान सुरिंदर सिंह, ब्यास देव, अवतार सिंह, लब्बा राम ने बताया कि नहरी पानी उपलब्ध होने से किसानों की फसल अच्छी होने की उम्मीद जगी है। अमूमन जिले के किसान बिजली की कटौती से परेशान रहते हैं। यदि सिंचाई के लिए नहरी पानी उपलब्ध होगा तो किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। इसके अलावा वह धान-गेहूं के अलावा अन्य फसलें उगाने पर भी विचार कर सकते हैं। नहरी पानी सिंचाई के लिए मिलने से किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। किसानों के अनुसार उनके क्षेत्र में संपर्क नहर तो है लेकिन उसमें पानी की किल्लत बनी रहती है। उक्त नहर में उज्ज दरिया से पानी की आपूर्ति की जाती है।
किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेश इस बजट को कृषि के लिए अच्छा बताया। इसके साथ ही सांबा जिले में डोगरा संस्कति के संरक्षण और इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए डुग्गर धानी यानी ऐसी जगह का विकास किया जाएगा जहां एक छत के नीचे पूरी डोगरा संस्कृति की झलक मिल सके। इससे पर्यटकों को जम्मू-कश्मीर की फोक कला तो देखने को मिलेगी ही बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार
भी मिलेगा।
डोगरी को ऊंचा उठाने के लिए रखा फंड
सांबा। जिले में डोगरी को पहचान देने के लिए केंद्रीय बजट में फंड रखे गए हैं। मॉक विलेज के रूप में डुग्गरधानी को नया रूप दिए जाने से डुग्गर संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें एक ही स्थान पर डुग्गर संस्कृति को झलक देखने को मिलेगी। डुग्गर को पहचान दिलाने की पहल का हर तरफ से स्वागत किया है। डोगरी कवि, डोगरी लेखक, डोगरा सदर सभा के सदस्यों ने केंद्र सरकार का आभार जताया है। डुग्गर संस्कृति को एक बार फिर से नई पहचान मिल सके। इससे संस्कृति फिर से जीवंत होगी।