उन्होंने बताया कि कुरान पाक में कहा गया है कि इस पूरी कायनात का मालिक अल्लाह है। व्यक्ति को उसका आदर व सम्मान करना चाहिए। रोजा रखने का मतलब सिर्फ खानपान छोड़ देना ही नहीं है बल्कि एक दूसरे की बुराई करना भी गलत बताया गया है। कुरान पाक में यह बताया गया है कि रोजेदार को न तो किसी की बुराई करनी है और न ही देखनी और सुननी है। यहां तक ताकीद की गई है कि किसी को भी अपनी जबान से ऐसी कोई बात नहीं करनी है जिससे उसके दिल को ठेस पहुंचेे और अल्लाह को वह बात पसंद न आए।
इफ्तार कराना बड़ा सवाब
रोजेदार को इफ्तार कराना बड़ा सवाब है। इसमें जरूरी नहीं है कि रोजेदार को अच्छे और स्वादिष्ट पकवान ही खिलाए जाएं। रोजा इफ्तार पानी पीकर या नमक का स्वाद लेकर भी किया जा सकता है, साथ ही रोजेदार पर भी यह फर्ज है कि वह अपनी तरफ से किसी अन्य चीज की इच्छा न रखे। अगर किसी ने इफ्तार के लिए रोजेदार को अपने यहां दावत दी है तो उसे कुबूल करे और इफ्तार में किसी भी तरह की आरजू न रखे।
एक के बदले 70 गुना लाभ
रोजे के बारे में बताया गया है कि रमजान माह में अगर कोई एक नेक काम करता है तो उसके बदले में अल्लाहताला उसे 70 गुना फायदा देते हैं। यह सिर्फ धन दौलत, खानपान या किसी वस्तु से जुड़ा नहीं है, बल्कि किसी को रास्ता बता देना, किसी की मदद करना, किसी का बिगड़ा काम बनाना आदि शामिल हैं।
रमजान माह का चांद निकलने से शाम को ईशा की नमाज के साथ तरावीह (विशेष नमाज) पढ़ी जाती है, और ईद का चांद देखने के साथ खत्म होती है। पूरे दिन की इबादत के बाद शाम को पढ़ी जाने वाली यह नमाज अव्वल मानी गई है। इसे अच्छे दिल से पढ़ा जाता है।
हजार रातों से बेहतर शब-ए-कद्र
रमजान माह के दौरान 25 रोजा को शब-ए-कद्र रात होती है। इस रात को जाग कर खुदा की इबादत की जाती है। इसे हजारों रात से बेहतर माना गया है।
लॉकडाउन का करें पालन
इस समय हमारा देश भयानक बीमारी कोरोना से जूझ रहा है। सरकार ने भी सभी से दूरी बनाए रखने की बात की है। ऐसे में हम सभी इस बात का ध्यान रखें और अपने घरों में ही रह कर अल्लाह की इबादत करें और लॉकडाउन का पालन करें। -मुफ्ती फारूक मोहम्मद कासमी, इमाम व खतीब, जामा मस्जिद, तेली बस्ती, बाड़ी ब्राह्मणा।