गठबंधन राजनीति के माहिर माने जाने वाले राम माधव एक दिन के लिए जम्मू पहुंचे थे। भाजपा के त्रिकुटानगर स्थित मुख्यालय में वे करीब 23 मिनट पत्रकारों के बीच रहे। उन्हें पहले से ही नेकां में हलचल से जुड़े सवालों का अंदेशा था। लिहाजा, बैठते ही पत्रकारों से बोले-आपके मन में जो सवाल है, मैं उस पर टिप्पणी नहीं करने वाला।
वहीं, जब नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा का आंसू पोंछने से संबंधित बयान को कोट कर जवाब लेने की कोशिश की गई तो राम माधव रूहुल्ला की रैली को आशीर्वाद की बात कर काफी कुछ संकेत दे दिए। हालांकि, उन्होंने नेकां की आंतरिक कलह में भाजपा की कोई भूमिका होने से साफ इन्कार किया।
नेकां बंटी हुई पार्टी
उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी नेकां साफ तौर पर बंटी हुई है। उसके नेता आपस में लड़ रहे हैं। उन्हीं की पार्टी के एक सांसद सामने आए हैं और कार्यक्रम कर रहे हैं। यह उनका अंदरूनी मामला है। इससे हमारा क्या लेना-देना?
बोले-किसी पुल के पास पहुंचते हैं तभी उसे पार करते हैं
जम्मू-कश्मीर में वर्तमान सियासी हलचल के बीच भविष्य में संभावित राजनीतिक घटनाक्रमों और उनके असर के बारे में पूछे जाने पर राम माधव ने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। बोले-किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले हालात को सामने आने देना होगा। जब आप किसी पुल के पास पहुंचते हैं, तभी उसे पार करते हैं।