राजोरी के ढांगरी नरसंहार में शामिल आतंकी बहुत ही प्रशिक्षित हैं। वह अन्य आतंकियों की तुलना में बिल्कुल अलग हैं। वह लोगों के घरों में जाकर उन्हें डराते धमकाते नहीं हैं, बल्कि उनको पैसा देकर खाना खाते हैं। यहां तक कि लोगों के बीच गुल मिलकर रहते हैं। कुछ दिन का सामान खरीद कर अपने ठिकानों पर चले जाते हैं।
आतंकी इतने शातिर हैं कि खुद के मोबाइल फोन का इस्तेमाल तक नहीं करते। वह किसी दूसरे का मोबाइल फोन पैसे देकर इस्तेमाल करते हैं। चंद मिनट के लिए फोन लेकर उसमें एक मोबाइल एप इंस्टाॅल करते हैं। इस एप से पाकिस्तान में मौजूद लश्कर कमांडर सैफुल्लाह साजिद जट्ट से बात करते हैं। बात करने के बाद फिर से एप को फोन से अनइंस्टॉल कर देते हैं।
आतंकियों की यह रणनीति ढांगरी नरसंहार मामले की जांच में सबसे बड़ा पहलू है। इस नरसंहार की जांच करने वाली एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ही यही है कि यह आतंकी दूसरों आतंकियों की तुलना में बिल्कुल अलग तरीके से काम कर रहे हैं। इस वजह से यह पकड़ में भी नहीं आ रहे।
ये भी पढ़ें- J&K Weather: कुलगाम में बादल फटा, अमरनाथ यात्रा रुकी, कल जम्मू संभाग में भारी बारिश के लिए अलर्ट
भाटादूड़िया में भी इन्हीं आतंकियों के होने का शक
पुंछ के भाटादूड़ियां और राजोरी के कंडी में सैन्य दल पर हमला करने वाले आतंकियों के ढांगरी के नरसंहार में भी शामिल होने का शक है। पिछले 20 महीनों से यह आतंकी राजोरी और पुंछ के जंगलों में हैं। लेकिन यह हमलों को अंजाम देकर लोगों के बीच गुल मिल जाते हैं। अब तक की जांच में यह सामने आया है कि यह आतंकी मार्केट आते हैं। लोगों के बीच रहते हैं और उनसे खाने पीने का सामान लेकर फिर छुप जाते हैं।
सैफुल्ला जट्ट और कासिम की करतूत
जानकारी के अनुसार राजोरी के ढांगरी नरसंहार के पीछे पाकिस्तान में मौजूद लश्कर कमांडर सैफुल्लाह साजिद जट्ट और कासिम हैं। सैफुल्लाह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसुर का रहने वाला है, जो 1990 से 2000 के बीच दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकी था। करीब 10 साल पहले भी वह दक्षिण कश्मीर में था।
बाद में वह पत्नी को लेकर पाकिस्तान लेकर चला गया। अब सैफुल्लाह पाकिस्तान में एक अन्य आतंकी रियाज अहमद उर्फ कासिम के साथ मिलकर राजोरी-पुंछ में आतंकी वारदातों को अंजाम दे रहा है। कासिम रियासी जिले के माहौर का रहने वाला है।