रास्ते में कहीं नहीं मिले ट्रैफिक पुलिस कर्मचारी
एक यात्री ने बताया कि वह शिकायत करते भी तो किससे। कोटरंका से हादसा स्थल के 25 किलोमीटर के सफर में कहीं पर भी ट्रैफिक का कोई कर्मचारी या कोई नाका नजर नहीं आया। नाका नहीं होने का भी एक कारण है कि इस रूट पर चालक लापरवाही से और ओवरलोडिंग कर सवारी गाड़ियां भगाते हैं।
लोगों में रोष-कहा-नाका होता, तो हादसा न होता
लोगों में हादसे के बाद यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के खिलाफ रोष है। उनका कहना कि इस हादसे की पीछे चालक के साथ दोनों विभाग उतने ही जिम्मेदार हैं। कंडी कोटरंका के समाज सेवक ठाकुर सुरजीत सिंह ने बताया कि कोटरंका बस अड्डे से लेकर हादसे वाले स्थान तक 25 किलोमीटर दूरी में यातायात पुलिस का एक भी नाका नहीं है। यही कारण है कि इस रूट पर ओवरलोड और ओवरस्पीड सवारी वाहन निकलते हैं।
बुद्धल केवल के सरपंच फारुक इंकालबी ने कहा कि इस रूट पर हर रोज टेम्पों ट्रेवलर ऐसी ही मनमानी करते हैं। हर टेम्पों ट्रेवलर क्षमका ले अधिक सवारियां लेकर चलता है। ऊंची आवाज में म्यूजिक चलाना और मोबाइल फोन पर बात आम हो गया है। कंडी के सरपंच मनीर मिर्जा ने उप राज्यपाल प्रशासन से हादसे को लेकर यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाने की अपील की। युवा भाजपा नेता मंज़ूर नाइक ने विशेष नाके लगाने के लिए कहा।