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मौसम के बदले मिजाज से पारा गिरा

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जम्मू। राज्य के मौसम में उतार चढ़ाव जारी है। मौसम में आए बदलाव से अधिकतर जिलों के पारे में गिरावट आई है। घाटी में ठंडक बढ़ी है। जम्मू संभाग में भी तपिश से राहत मिली है। शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में बारिश हुई। मौसम विभाग श्रीनगर के अनुसार शनिवार को जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है।
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जम्मू में शुक्रवार की शुरुआत हल्के बादलों के साथ हुई। इस बीच कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई, लेकिन दिन चढ़ने के साथ मौसम साफ हो गया। दोपहर को धूप खिली, लेकिन तपिश का अहसास नहीं हुआ। वीरवार की शाम शहर में तेज हवाओं का नजारा देखने को मिला। कई जगह पेड़ गिरे हुए थे। जम्मू में चौबीस घंटे में 23.8 मिलीमीटर बारिश के साथ दिन का तापमान सामान्य से 4.7 डिग्री गिरकर 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जबकि बीती रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री गिरकर 17.0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर कटड़ा में दिन का तापमान सामान्य से 6.2 डिग्री गिरकर 23.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां 11.2 मिलीमीटर बारिश हुई। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में दिन का तापमान सामान्य से 9.5 डिग्री गिरकर 15.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यहां 11.8 मिलीमीटर बारिश हुई। कई जिलों में दिन का तापमान दस डिग्री तक चला गया है।
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तेज हवाओं से 50 फीसदी बासमती ढही
-पैदावार में 25 प्रतिशत गिरावट आएगी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। संभाग के विभिन्न हिस्सों में वीरवार की शाम को 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं से खेतों में धान की फसल लेट गई है। स्कास्ट जम्मू के अनुसार 50 फीसदी फसल खेतों में गिर गई है। इससे पौधों से सीटा भी अलग हुआ है। इससे किसानों को फसलों को 25 फीसदी नुकसान सहना पड़ेगा। सांबा, जम्मू और कठुआ में बासमती की फसल को अधिक नुकसान हुआ है। खेतों में ढही फसल से किसानों की चिंताएं बढ़ी हैं। स्कास्ट जम्मू की टीम ने प्रभावित इलाकों में दौरा कर आकलन किया। इस बार भी बासमती 370 के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है। रिसर्च डायरेक्टर, स्कास्ट-जे जेपी शर्मा के अनुसार आगामी दिनों में अगर तेज हवाएं चलती हैं तो धान की फसल को नुकसान और बढ़ेगा।
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पहले बारिश न होने से चिंतित थे किसान
अभी तक जम्मू संभाग में 710 एमएम बारिश हुई है। मौजूदा समय में अच्छी पैदावार के लिए 800 एमएम तक बारिश होना जरूरी था। इससे भी 10 से 15 फीसदी पैदावार में गिरावट आ सकती है। गत दिवस एक घंटे में ही तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
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सीमावर्ती इलाकों में नहीं हो पाई है बिजाई
सीमावर्ती इलाकों में बारिश न होने से बिजाई का काम नहीं हो पाया है। यहां पर किसान मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। सिंचाई के लिए नहर व अन्य सुविधाओं का अभाव है। धान की फसल बिजाई की न होने से किसान चिंतित हैं।
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