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बारिश ने फेरा किसानों की मेहनत पर पानी

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ज्यौड़ियां। खौड़ उपजिले के मैदानी क्षेत्र में एक बार फिर बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों की तरफ से दो-दो बार बीजी गई गेहूं की फसल के खेतों में फिर से पानी भर गया है।
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किसानों ने बताया कि उन्होंने पहले दिसंबर में गेहूं की फसल का बीज लगाया था और उस समय भी बारिश हो गई और फसल के अंकुर नहीं निकले, जिस पर हमने एक बार फिर खेतों में बीज और खाद का छिड़काव कर दिया, लेकिन फिर बारिश से खेत पानी से भर गए हैं। इसको देख कर लग रहा है कि बीजी गई फसल का अंकुर अब दूसरी बार फिर नहीं निकलेगा। हमारी मेहनत पर एक बार फिर पानी फिर गया है। दूसरी तरफ उपजिले के कंडी क्षेत्र के किसानों के चेहरों पर खेतों में लहराती गेहूं तथा सरसों की फसल को देख कर खुशी साफ दिखाई दे रही है। संवाद
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बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
परगवाल। सीमा क्षेत्र परगवाल में शनिवार को रात से हो रही बारिश रविवार रात तक जारी रही। बारिश से जहां आम आदमी परेशान रहा, वहीं दूसरी तरफ इस बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। क्योंकि उनके खेतों में बारिश का पानी भर गया है। इससे उनकी गेहूं की फसल के खराब होने की आशंका बन गई है।
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हालांकि मंगलवार को मौसम सफ रहा और तेज धूप खिली, लेकिन किसान वर्ग इससे ज्यादा खशी नहीं दिखा। किसान बलवान सिंह ने कहा कि कुदरत पर निर्भर रहने वाला किसान हमेशा कुदरत का शिकार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समय गेहूं की फसल को अच्छी धूप की दरकार है, लेकिन बारिश ने सब कुछ बिगाड़ कर रख दिया है। किसान रतन शर्मा ने कहा कि वह अपने निचले खेतों में गेहूं की बुआई नहीं कर पाए। क्योंकि वह खेत सूखने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन हाल में हुई बारिश से उनके खेतों में बहुत ज्यादा पानी जमा हो गया है। अब उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें। संवाद
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चौदह घंटे की बारिश के बाद मौसम साफ
खेतों में भरा पानी, गेहूं बिजाई की आस भी टूटी
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। क्षेत्र में सोमवार सुबह चार बजे से हो रही बारिश शाम छह बजे तक जारी रही। इससे लोहड़ी पर्व भी बारिश की भेंट चढ़ गया। वहीं बारिश से यहां का जनजीवन भी अस्त व्यस्त रहा। खेतों में एक बार फिर से जलभराव हो गया, जिससे किसानों की गेहूं बिजाई की आखिरी आस भी टूट गई।
किसानों के अनुसार इस बार लगातार बेमौसम बारिश के चलते कुछ दिन पहले गेहूं बिजाई की आस लेकर जी रहे किसानों की सोमवार को हुई दिन भर की बारिश ने आखिरी उम्मीद पर भी पूरी पानी फेर दिया। बचन लाल, मनोहर लाल, गुरदीप सिंह, भारत भूषण सैनी व गुरिंदर सिंह आदि किसानों का कहना है कि गेहूं बिजाई की आस तो अब पूरी तरह से खत्म हो गई है, जिससे हमारे पास सिर्फ दो ही विकल्प बचे हैं या तो धान रोपाई तक खेतों को खाली रहने दें या फिर मक्की की फसल की विजाई करें, जिसके लिए अभी से सोचना शुरू कर दिया।
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रामगढ़ में 29 घंटे बाद बहाल हुई बिजली
रामगढ़। बिजली विभाग की लापरतवाही से हो रही बिजली गुल। सीमावर्ती गांव रामगढ़, नंदपुर, खोड़ सलारियां, चक छटाका, हीराचक, स्वाखां आदि में बिजली गुल होने के कारण सेवा प्रभावित हो रही है। इससे बड़े हादसे की आशंका भी बन रही है। इससे दुकानदारों और लोगों को काफी नुकसान हो रहा है। हर गांव में ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं लेकिन किसी को भी अभी कवर नहीं किया गया। लोगों ने इसे कवर करने की मांग की है। 33 केवी लाइन नंद पुर से रामगढ़ की ओर जाती है उसका एक पोल नंद पुर में करीब पांच फुट नीचे आ गया है जिससे लोगों को हादसे की आशंका हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि तार टकराने से कई घंटे तक बिजली प्रभावित हो जाती है। सोमवार को आई बारिश और तेज हवा के चलते नंदपुर और शिब्बू चक में सुबह छह बजे 11, 33 केवी लाइन के छह पोल गिर गए। इन्हें मंगलवार की सुबह करीब 11 बजे दुरुस्त किया जा सका। इस कारण 29 घंटे बिजली गुल रही। विक्की सिंह, हैप्पी जमवाल, पूर्व सरपंच ओमप्रकाश, तेजेंद्र सिंह, मोहन सिंह भट्टी ने कहा कि क्षेत्र में जब भी बारिश होती है तो कई घंटे बिजली गुल हो जाती है। संवाद
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