आक्रोशित सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन कर जिला उपायुक्त आयुषी सूदन को सौंपा ज्ञापन
कोरोना काल के बाद बंद हुआ ट्रेनों का ठहराव तत्काल बहाल कराने की मांग उठाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की मांग को लेकर मंगलवार को सीमावर्ती गांवों तथा जिले के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने प्रदर्शन किया बाद में एक शिष्टमंडल ने उपायुक्त आयुषी सूदन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि रेलवे स्टेशन पर अधिक ट्रेनों का ठहराव जल्द से जल्द बहाल कराया जाए, अन्यथा उन्हें आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
डीसी आयुषी सूदन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 25 अगस्त से पहले रेलवे अधिकारियों से बातचीत करेगा और समस्या के समाधान का प्रयास करेगा। शिष्टमंडल के सदस्यों पूर्व सरपंच गिरदारी लाल शर्मा, पूर्व सरपंच विनोद कुमार, बजरंग दल के प्रवीन कुमार, विजय सिंह काटल, शिवदेव सिंह आदि ने चेतावनी दी कि यदि 25 अगस्त तक ट्रेनों के ठहराव को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो सांबा रेलवे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कोरोना महामारी के पहले सांबा रेलवे स्टेशन पर एक दर्जन ट्रेनों का ठहराव था, कोरोना के दौरान अधिकांश ट्रेनें बंद कर दी गई थीं। महामारी समाप्त होने के कई वर्ष बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। वर्तमान में यहां केवल डीएमयू और हरिद्वार जाने वाली एक ट्रेन का ही ठहराव है, जबकि अन्य प्रमुख ट्रेनें बिना रुके गुजर जाती हैं।
लोगों का कहना है कि इस मांग को लेकर वे कई बार रेलवे अधिकारियों, केंद्रीय मंत्रियों, सांसद जुगल किशोर शर्मा तथा विधायक सुरजीत सिंह सलाथिया से भी मिल चुके हैं। हर बार आश्वासन तो मिला, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सांसद जुगलकिशोर शर्मा भी नहीं रुकवा सके ट्रेनें
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष अगस्त में सांसद जुगल किशोर शर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर सांबा रेलवे स्टेशन पर कई ट्रेनों के ठहराव की मंजूरी मिलने की जानकारी दी थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद उन ट्रेनों का ठहराव शुरू नहीं हो सका।
कठुआ या जम्मू जाकर करते हैं सफर
लोगों ने कहा कि जिला मुख्यालय होने के बावजूद सांबा रेलवे स्टेशन की स्थिति चिंताजनक है। यात्रियों को ट्रेन पकड़ने या उतरने के लिए जम्मू अथवा कठुआ जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है। औद्योगिक एवं व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला होने के बावजूद रेलवे की यह उपेक्षा स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी का कारण बनी हुई है।