आतंकियों पर कार्रवाई के बाद अब इनके लिए काम करने वाले ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) जांच एजेंसियों और सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर हैं। आतंकवाद के सबसे बड़े समर्थक ओजीडब्ल्यू का नेटवर्क ध्वस्त करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
थानास्तर पर इनके रिकाॅर्ड फिर से अपडेट किए जा रहे हैं। खुफिया एजेंसियां उन लोगों की भी जानकारी जुटा रही हैं, जिनके रिश्तेदार पाकिस्तान में हैं। पुलिस आत्मसमर्पण कर चुके आतंकियों पर भी नजर रख रही है। वहीं, जो लोग पाकिस्तान भेजे गए हैं, उनके संपर्क में रहने वाले तमाम लोग भी पुलिस के रडार पर हैं।
सूत्रों का कहना है कि कश्मीर के पुलवामा, शोपियां, अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामुला और जम्मू संभाग के राजोरी, पुंछ, रियासी, डोडा, कठुआ, उधमपुर जिलों में पुलिस नए सिरे से ओजीडब्ल्यू का रिकाॅर्ड बना रही है। इनकी तमाम गतिविधियां देखी जा रही हैं। इनके संपर्क में रहने वाले लोग भी रडार पर हैं। इनके सोशल मीडिया अकाउंट भी खंगाले जा रहे हैं।
इन अकाउंट के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि बीते कुछ समय में भारत विरोधी किस तरह की गतिविधियां चलाई जा रही हैं। एसआईए के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि ओजीडब्ल्यू का नेटवर्क ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही इस दिशा में परिणाम दिखेंगे, जिसे अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
जेल में बंद आतंकियों की कुंडली खंगाली जा रही
बताया जा रहा है कि जम्मू की कोट भलवाल, श्रीनगर की सेंट्रल जेल में बंद आतंकियों की कुंडली भी खंगाली जा रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), राज्य जांच एजेंसी (एसआईए), पुलिस की सीआईडी विंग मिलकर इन आतंकियाें का रिकाॅर्ड टटोल रही हैं। देखा जा रहा है कि जेल में इनका किन-किन लोगों से संपर्क ज्यादा है। बीते दो वर्ष में इनसे कौन-कौन लोग मिलने आए हैं, क्योंकि जांच एजेंसियों को शक है कि जेल में बंद इन आतंकियों की ओर से ही बड़े स्तर पर ओजीडब्ल्यू वर्कर तैयार हो रहे हैं।
जासूसों पर भी पुलिस की नजर
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों पर पूरी नजर रख रहे हैं। जिस तरह से हरियाणा की रहने वाली यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा पाकिस्तान के लिए जासूसी करती पकड़ी गई है, उसके बाद प्रदेश की पुलिस भी सतर्क हो गई है। पुलिस कड़ी निगरानी से सोशल मीडिया हैंडल खंगाल रही है, ताकि पता चल सके कि कौन-कौन से लोग की गतिविधियां संदिग्ध हैं।
मुख्य बातें एक नजर में
- इन जिलों पर ज्यादा फोकस : पुलवामा, शोपियां, अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामुल्ला, जम्मू संभाग के राजोरी, पुंछ, रियासी, डोडा, कठुआ, उधमपुर
- 1990 से ओजीडब्ल्यू कर रहे हैं आतंकी संगठनों के लिए काम
- 2000 के करीब ओजीडब्ल्यू थानास्तर पर काम कर रहे हैं
- 15 हजार रोहिंग्या भी बड़ी चुनौती हैं
- 05 साल में 80 सरकार मुलाजिमों की पहचान की गई है