कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की वर्षों पुरानी दोस्ती में दरार आ गई लगती है। यह दरार विधानसभा चुनाव के दौरान तब सामने आई जब राहुल ने अपने उमर पर विकास कार्यों में सहयोग न देने का आरोप लगाया। यह अलग बात है कि उमर ने इसका कोई जवाब नहीं दिया।
राहुल और उमर काफी समय से एक दूसरे को जानते पहचानते और पसंद करते हैं। पिछले छह वर्षों के दौरान नेकां-कांग्रेस गठबंधन की सरकार में उनकी राजनीतिक दोस्ती खूब परवान चढ़ी। राहुल ने हमेशा उमर और गठबंधन सरकार के कार्यों की सराहना की। बीते लोकसभा चुनाव में उमर ने रियासत में अपने दोस्त की भरपूर मदद की।
हर जगह कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने के साथ ही कार्यकर्ताओं को कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने का मंत्र भी दिया। हालांकि, इसके बाद भी कांग्रेस और नेकां का रियासत से सूपड़ा साफ हो गया। विधानसभा चुनाव में दोनों दलों के बीच गठबंधन टूटने के साथ ही स्थानीय कांग्रेसी नेताओं की उमर के साथ तल्खी बढ़ गई। दोनों ओर से आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, लेकिन राहुल ने कभी भी न तो उमर पर हमला बोला और न ही उमर ने राहुल पर कोई टिप्पणी की।