घटना के बाद सभी विस्थापितों की कॉलोनी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। बडगाम के शेखपोरा के साथ ही अनंतनाग के वेसू तथा उत्तरी कश्मीर में रह रहे कर्मचारियों की कॉलोनी के बाहर सुरक्षा घेरा मजबूत करने के साथ ही गश्त भी बढ़ा दी गई है। संबंधित प्रशासन का कहना है कि विस्थापितों से मिलकर उन्हें आश्वस्त किया गया है कि उनकी सुरक्षा के मुकम्मल प्रबंध किए गए हैं। घबराने की जरूरत नहीं है।
मैं बडगाम में आतंकवादियों द्वारा राहुल भट्ट की बर्बर हत्या की कड़ी निंदा करता हूं। इस घिनौने आतंकी हमले के पीछे के लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। इस दुख की घड़ी में जम्मू-कश्मीर सरकार शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी है।-मनोज सिन्हा, उप राज्यपाल
अनुच्छेद 370 हटने के बाद से 14 हिंदुओं-कश्मीरी पंडितों की हत्या
अनुच्छेद 370 हटने के बाद पांच अगस्त 2019 से अल्पसंख्यक हिंदुओं तथा गैर कश्मीरियों पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं। लगभग तीन साल में आतंकियों ने कम से कम 14 गैर मुस्लिमों, गैर कश्मीरियों तथा कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी है। इनमें प्रमुख कारोबारी, सरपंच तथा बीडीसी सदस्य शामिल हैं।
कश्मीरी पंडितों पर दो साल में आतंकी हमले
चार अप्रैल: शोपियां जिले के चित्रागाम में दवा कारोबारी सोनू कुमार पर हमला, इस परिवार ने आतंकवाद के दौर में भी घाटी नहीं छोड़ी थी।
नवंबर 2021: श्रीनगर में कश्मीरी पंडित कारोबारी संदीप मावा की कार को निशाना बनाकर हमला। इसमें उसके कर्मचारी की मौत हो गई थी।
अक्तूबर 2021 : कश्मीरी पंडित दवा कारोबारी एमएल बिंदरू की आतंकियों ने दुकान में घुसकर की हत्या।
जून 2020: कश्मीरी पंडित सरपंच अजय पंडिता की अनंतनाग जिले में दहशतगर्दों ने हत्या कर दी थी।
लश्कर-ए-इस्लाम ने दी थी धमकी
अप्रैल के महीने में आतंकी संगठन लश्कर-ए-इस्लाम ने कश्मीरी पंडितों को पत्र भेजकर चेताया था कि या तो वे घाटी छोड़ दें या फिर इस्लाम कबूल कर लें। इस पत्र से कश्मीरी पंडितों में दहशत का माहौल रहा। बारामुला में यह पत्र लगभग सभी पंडितों के घर पर भेजा गया। इसके बाद पंडितों ने प्रशासन ने मिलकर सुरक्षा के मुकम्मल प्रबंध कराने की मांग की।