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विश्व रेडियो दिवस: शिक्षा के क्षेत्र में रेडियो की भूमिका अहम, ग्रामीण इलाकों में आज भी है खास

Mon, 13 Feb 2023 04:29 PM IST
kumar गुलशन कुमार मंगेश कुमार, जम्मू

सार

केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीते डेढ़ साल पहले सामुदायिक रेडियो केंद्र खोलने को मंजूरी दी गई है। फिलहाल विश्वविद्यालय इमारत के लिए स्थान को चिह्नित कर रहा है। शिक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने सामुदायिक रेडियो केंद्र खोलने का कदम उठाया है।
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विश्व रेडियो दिवस - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आधुनिक भारत में रेडियो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म के साथ अधिक लाजमी हो गया है। शिक्षा के साथ बाकी क्षेत्रों में भी इसकी अहम भूमिका है। खासकर ग्रामीण इलाकों में आज अभी भी रेडियो के कार्यक्रम खास महत्व रखते हैं। बुजुर्ग रेडियो साथ लेकर चलते हैं। शुक्रवार के दिन तो फरमाइश पर पसंदीदा गाने भी सुनाए जाते हैं। किसानों को फसलों से संबंधित जानकारियां मुहैया करवाई जाती हैं। जनसंचार के शिक्षाविदों के अनुसार कोरोना काल में भी रेडियो ने छात्रों की पढ़ाई में मदद की है। अब तो मोबाइल में भी एप के जरिये से रेडियो सुना जा सकता है। शिक्षाविदों के अनुसार बदलते भारत के साथ रेडियो ने भी अपने स्वरूप को बदला है।

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अब मोबाइल पर आसानी से उपलब्ध

जहां भी जाएं, वहां रेडियो आसानी से सुन सकते हैं। मोबाइल फोन समेत बाकी प्लेटफार्म पर भी रेडियो उपलब्ध है। वाहन चलाना हो, खेतीबाड़ी करनी हो या किसी भी प्रकार के बाकी काम हों तो वहां रेडियो को आसानी से सुना जा सकता है। नई पीढ़ी को रेडियो का महत्व बताने के उद्देश्य से इस दिन को खास रूप से मनाया जाता है।

दैनिक जीवन में संदेश देने में रेडियो सहायक

भारतीय जनसंचार संस्थान जम्मू के सहायक आचार्य विनीत उत्पल ने कहा, 13 फरवरी को रेडियो दिवस राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। पहली बार 2012 में 13 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र संघ में विश्व रेडियो दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। दैनिक जीवन में संदेश देने में रेडियो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म से अलग है, जो लोग पढ़ नहीं सकते हैं। उन्हें समाचार देने या मनोरंजन के लिए रेडियो मील का पत्थर साबित हुआ है।
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अब पोडकास्ट सुनकर अपना समय बचाएं

केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के जनसंचार एवं नवीन मीडिया विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अर्चना कुमारी ने कहा कि अपने बाकी कामों के साथ रेडियो सुनकर अपनी जरूरत को पूरा कर सकते हैं। अब तो पोडकास्ट का सरल तरीका है, टीवी देखने और अखबार या किताबें पढ़ने के लिए अलग से समय देना पड़ता है, लेकिन पोडकास्ट ने और ज्यादा आसानी बना दी है। कोरोना काल में भी रेडियो ने छात्रों को पढ़ाई में मदद की है। आधुनिक भारत में कई गुना शिक्षा के क्षेत्र में रेडियो की जरूरी है।

केंद्रीय विवि और जम्मू विवि में भी अब रेडियो
जम्मू संभाग के केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीते डेढ़ साल पहले सामुदायिक रेडियो केंद्र खोलने को मंजूरी दी गई है। फिलहाल विश्वविद्यालय इमारत के लिए स्थान को चिह्नित कर रहा है। शिक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने सामुदायिक रेडियो केंद्र खोलने का कदम उठाया है। इसका लाभ पत्रकारिता के साथ विश्वविद्यालय के सभी विभागों और ग्रामीणों को मिलेगा। इसके अलावा बीते माह जम्मू विश्वविद्यालय के वीसी ने भी एफएम रेडियो को शुरू करने की घोषणा की है।

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