रेडियो कश्मीर के तत्वावधान में पुलिस आडिटोरियम में गणतंत्र दिवस समारोह के उपलक्ष्य में महफिल-ए-कव्वाली का आयोजन हुआ। इसमें दिल्ली तथा लखनऊ के मशहूर कव्वालों ने अमीर खुसरो के सूफी कलामों से नवाजा।
लखनऊ के सादत हुसैन खान व उनके साथियों ने बहुत कठिन है डगर पनघट की... पेश कर खूब वाहवाही लूटी। चाहता उसको हूं जिसका कोई जवाब नहीं... और आओ सखी मिल चौसर खेलें... को भी खूब सराहा गया।
रेडियो कश्मीर के मंच से जानकारी दी गई कि सादत हुसैन को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी को 2001 में सम्मानित किया जा चुका है। जबकि सादत हुसैन की कव्वाली गायन की प्रतिभा को पूर्व राष्ट्रपति डा. जाकिर हुसैन, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी देख चुके हैं।
दिल्ली के नवाज साबरी एवं पार्टी की महफिल में कव्वाली संगीत की पारंपरिक धुनें सुनने को मिलीं। इसमें अमीर खुसरो की प्रसिद्ध रचना छाप तिलक सब छीन्हीं, मोसे नैना मिलायके शामिल रही। खुसरो दरिया प्रेम का... गोरी सोए सेज पर.. चला खुसरो घर आपने... श्रोताओं को भा गईं।
इस मौके पर डिप्टी डायरेक्टर जनरल इंजीनियरिंग केके सिंह और रेडियो कश्मीर जम्मू स्टेशन डायरेक्टर वीके संब्याल आदि मौजूद रहे।