शिकायतकर्ता की पैरवी के लिए तैयार नहीं हुआ था कोई वकील
हाईकोर्ट ने आरोपों की गंभीरता पर भी जोर दिया है। कहा कि मामला पहले प्रदेश जांच एजेंसी (एसआईए) को सौंपा गया था। बाद में निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए इसे श्रीनगर से जम्मू स्थानांतरित कर दिया गया। कोर्ट ने गवाहों को धमकाने जैसे आरोपों और श्रीनगर में किसी भी वकील को शिकायतकर्ता की पैरवी के लिए तैयार न होने का भी हवाला दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर रिहाई से ट्रायल पर असर पड़ सकता है क्योंकि ज्यादातर गवाहों की गवाही अभी बाकी है।