एसकेआईसीसी में आयोजित चिनार पुस्तक महोत्सव के छठे दिन वीरवार की सुबह कठपुतलियों ने शब्दों से बढ़कर कथाएं बांची। चिल्ड्रेन कॉर्नर में आयोजित इस विशेष आयोजन में कहानियां शब्दों के पार जाकर नाचती पोशाकों, उनकी परछाइयों और अद्भुत अंदाज में सुनी गई। खुशी से चमकती बच्चों की आंखों और चेहरों पर उभरी जिज्ञासा को देखकर सहज ही अहसास हो रहा था कि वह पहली बार किसी ऐसे आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं जहां कहानी सिर्फ कानों से नहीं, बल्कि दिल से भी सुनी जा रही है।
सीमा वाही ने एक ऐसे ड्रैगन की कहानी सुनाई, जो उड़ना नहीं जानता था। यह कठपुतली के माध्यम से सुनाई गई एक ऐसी कहानी थी जिसने बच्चों को उम्मीद और धैर्यशीलता का सबक दिया। ब्रौद एंड ब्लूम सेशन में उन्होंने बच्चों को श्वास की वह तकनीक सिखाई जिसमें वे अपनी सांसों के माध्यम से खुद को शांत रखने में मदद कर सकते हैं, फिर चाहे समय कैसा भी हो। एक अन्य सत्र में रईस मोहिउद्दीन, मुनीर और मनोज शीरी ने आरजे मुरसाल से बात करते हुए कहा कि कैसे कहानियां विभिन्न माध्यम तय करते हुए किताबों से स्टेज तक, परफॉर्मेंस से मास मीडिया तक पहुंचती हैं।
वहीं दूसरी तरफ महोत्सव में मंच से मैदान में उतरे लोक कलाकारों ने उसे ही मंच बना लिया तो लोग उनकी थिरकन में खो गए। कोई तालियां बजा रहा था, कोई चीयर अप कर रहा था। शाम के समय सांस्कृतिक संध्या में धनंजय कौल ने शास्त्रीय संगीत का जादू बिखेरा तो कृषा भट्ट की आवाज़ पूरे परिसर में गूंज उठी। शाज़िया बशीर के गीतों ने पूरा माहौल संगीतमय कर दिया। समापन राशिद हाफ़िज़ के भक्ति संगीत के साथ हुआ। इस दौरान वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी, कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निलोफर खान आदि लोग मौजूद रहे।