जम्मू-कश्मीर राज्य में खासकर आतंकवाद ग्रस्त घाटी के लोगों के लिए मददगार बनी सीआरपीएफ को ही निशाना बनाया गया है। इसकी हर वर्ग ने कड़ी निंदा की है।
कुछ साल पहले घाटी में सीआरपीएफ की ओर से एक टोल फ्री हेल्पलाइन ‘मददगार’ (14411) की शुरुआत की थी। 24 घंटे काम करने वाली इस हेल्पलाइन का उद्देश्य संकट की घड़ी में कश्मीरी लोगों की मदद करना था। हेल्पलाइन के जरिये सैकड़ो लोगों की मदद भी गई है।
मगर पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर किए गए आत्मघाती हमले की कश्मीर के हर वर्ग के लोगों ने निंदा की है। सीआरपीएफ चाहे कश्मीरी युवाओं को नशे ली लत से दूर करने के लिए काउंसलिंग हो या फिर किसी आपदा में लोगों की मदद की बात हो सबसे पहले पहुंचती है। उसको निशाना बनाने वाली घटना की जितनी निंदा की जाए कम है।
गौरतलब रहे कि रियासत में 1989 में आतंकवाद का दौर शुरू होने के बाद से सीआरपीएफ लोगों की मदद के साथ आतंकियों से मुकाबला कर रही है। सूत्रों के अनुसार करीब 50 बटालियन रियासत में तैनात हैं यानी करीब 50 हजार जवान लोगों की सुरक्षा कर रहे हैं। सीआरपीएफ कश्मीर में आतंरिक सुरक्षा के लिए पुलिस के साथ अहम भूमिका निभा रही है।