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पुलवामा हमला: ‘मददगार’ को निशाना बनाने की कड़ी निंदा, बुरे वक्त में सीआरपीएफ ही आती थी काम

Fri, 15 Feb 2019 05:35 AM IST
Pranjal Dixit अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
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सीआरपीएफ - फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर राज्य में खासकर आतंकवाद ग्रस्त घाटी के लोगों के लिए मददगार बनी सीआरपीएफ को ही निशाना बनाया गया है। इसकी हर वर्ग ने कड़ी निंदा की है।
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कुछ साल पहले घाटी में सीआरपीएफ की ओर से एक टोल फ्री हेल्पलाइन ‘मददगार’ (14411) की शुरुआत की थी। 24 घंटे काम करने वाली इस हेल्पलाइन का उद्देश्य संकट की घड़ी में कश्मीरी लोगों की मदद करना था। हेल्पलाइन के जरिये सैकड़ो लोगों की मदद भी गई है।

मगर पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर किए गए आत्मघाती हमले की कश्मीर के हर वर्ग के लोगों ने निंदा की है। सीआरपीएफ चाहे कश्मीरी युवाओं को नशे ली लत से दूर करने के लिए काउंसलिंग हो या फिर किसी आपदा में लोगों की मदद की बात हो सबसे पहले पहुंचती है। उसको निशाना बनाने वाली घटना की जितनी निंदा की जाए कम है।
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गौरतलब रहे कि रियासत में 1989 में आतंकवाद का दौर शुरू होने के बाद से सीआरपीएफ लोगों की मदद के साथ आतंकियों से मुकाबला कर रही है। सूत्रों के अनुसार करीब 50 बटालियन रियासत में तैनात हैं यानी करीब 50 हजार जवान लोगों की सुरक्षा कर रहे हैं। सीआरपीएफ कश्मीर में आतंरिक सुरक्षा के लिए पुलिस के साथ अहम भूमिका निभा रही है।
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जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट : आईजीपी कश्मीर

पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। आईजीपी कश्मीर स्वयं प्रकाश पाणि के अनुसार जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

उन्होंने कहा कि यह एक आतंकी घटना है, जिसको लेकर सभी सुरक्षा एजंसियों ने जांच शुरू कर दी है। घटना में काफी जवान घायल हुए हैं। शहीद हुए जवानों की संख्या की पुष्टि नहीं हो पाई है।

घटना स्थल पर मौजूद एक अन्य अधिकारी ने बताया कि विस्फोट काफी जोरदार था। घटना के बाद शव और सामान दूर-दूर तक फैल गया था। घायलों को अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस, फोरेंसिक और बम स्क्वायड की टीमों ने मौके पर पहुंच कर जांच शुरू कर दी है।
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