जजों की सुरक्षा के संबंध में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को प्रतिवादी बनाते हुए तत्काल प्रभाव से सुरक्षा उपलब्ध करवाने को कहा। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एनपाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश ताशी राबस्तन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि बार-बार अवसर प्रदान करने के बावजूद अथारिटी यह बताने में असफल रही कि हाईकोर्ट के जज के रिटायर्ड होने के तुरंत बाद उन्हें सुरक्षा की किसी कैटेगरी में रखा गया है।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश के सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद एक से चार सुरक्षाकर्मी 8-8 घंटे की ड्यूटी में तैनात किए जाएं और एक पीएसओ प्रदान किया जाए। उन्हें मिलने वाली धमकियों के आधार पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करवाई जाए।
जहां तक रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीशों की सुरक्षा का मामला है, उनकी सुरक्षा एक साल तक बढ़ाई जाए। उसके बाद सुरक्षा समीक्षा समन्वय समिति की सिफारिश के आधार पर सुरक्षा बहाल की जाए। इसके अलावा प्रत्येक पूर्व एडवोकेट जनरल के निवास पर एक से तीन सुरक्षाकर्मी लगाए जाएं। इसके अलावा मांग के अनुरूप उन्हें पीएसओ भी प्रदान किए जाएं। कोर्ट ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर इस आदेश का अनुपालन किया जाए।