अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जलशक्ति और सिंचाई विभाग के अस्थायी कर्मचारी नियमितीकरण, लंबित वेतन और यूटी की तर्ज पर मानदेय अदायगी के लिए 500 से भी ज्यादा दिन से संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही। अब तक 6 अधिकारियों से मुलाकात, ज्ञापन देने सहित बैठकें कर चुके हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि कहीं भी सुनवाई नहीं हो पा रही। मामूली वेतन पर घर का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। लगभग 13 हजार कर्मचारी परेशान हैं।
जलशक्ति विभाग के खिलाफ मई 2022 से हड़ताल शुरू की गई जबकि सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने अगस्त 2022 से आंदोलन शुरू किया। इस दौरान मुख्य अभियंता, डिवकॉम, एडीसी, तहसीलदार से लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना से मुलाकात की। इस साल शुरुआत में सिंचाई विभाग के कर्मचारी मुख्य सचिव अटल डुल्लू और जलशक्ति विभाग के कर्मचारी प्रधान सचिव शालीन काबरा से मिल चुके हैं। कई बार चक्का जाम किया जा चुका है। विरोध रैलियां निकाली गईं। अधिकारियों की ओर से आश्वासन मिले कि मांगों को पूरा किया जाएगा, पर बाद में कुछ नहीं हुआ। जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारी 568 और सिंचाई विभाग के 526 दिन से मोर्चा खोले हुए हैं।
पीएचई इंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के पदाधिकारियों रवि हंस और होशियार सिंह ने कहा कि मांगें पूरी नहीं हो रही। अब उग्र आंदोलन किया जाएगा। प्रधान सचिव से लेकर अन्य अधिकारियों से मुलाकात की जा चुकी है। कर्मचारियों को 2015 से अब तक 72 माह के वेतन की अदायगी नहीं हुई। यूटी की तर्ज पर मानदेय नहीं मिल रहा। सेवानिवृत्ति का समय नजदीक है और हालात ऐसे हैं कि दस हजार रुपये मानदेय मिल रहा है जो नाकाफी है।
इसी तरह सिंचाई विभाग के अस्थायी कर्मचारियों का प्रदर्शन डेलीवेजर यूनियन आईएंडएफसी एंड रावी तवी जम्मू के बैनर तले जारी है। पदाधिकारी गारु राम, कमल किशोर, जय पाल, प्रदीप, सुरजीत कुमार और जगजीत सिंह ने कहा कि मानदेय बढ़ोतरी के साथ नियमितीकरण प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। अन्य विभागों में कर्मचारियों को लाभ मिल रहा है जबकि जेएंडके में दिक्कतें झेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जल्द आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मांगें सरकार के ध्यान में है, जिन्हें पूरा करवाने की कोशिश की जा रही है। जल्द राहत मिल सकती है।
- मनोज गुप्ता, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग