दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में शनिवार को आतंकी हमले में मारे गए कश्मीरी पंडित पूरण कृष्ण भट की हत्या के विरोध में सोमवार को श्रीनगर के राजबाग इलाके में ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) के कार्यालय के बाहर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने हुर्रियत कार्यालय के मुख्य गेट पर लगे बोर्ड को उतार फेंका। मेन गेट पर ‘इंडिया’ का भित्ति चित्र (ग्राफिटी) बना दिया। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली में पाकिस्तान दूतावास के बाहर भी प्रदर्शन करने की धमकी दी।
यह प्रदर्शन ‘आखिर कब तक’ के बैनर तले किया गया और इसमें कश्मीरी पंडित, स्थानीय मुसलमान और अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। हाथों में ‘आखिर कब तक’ के प्लेकार्ड लिए प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां जलाकर भट को श्रद्धांजलि दी और एलजी और केंद्र सरकार से कश्मीरी पंडितों की हत्याओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
एक प्रदर्शनकारी नन्ना जी डेम्बी ने कहा कि आज वह अपने कश्मीरी पंडित भाई के हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए एक साथ हुए हैं। हम सिर्फ यह पूछना चाहते हैं कि आखिर आए दिन कश्मीरी पंडित ही क्यों निशाना बन रहे हैं। प्रधानमंत्री से यह पूछना चाहते हैं कि ऐसे हालातों में कश्मीरी पंडित कैसे वापस घाटी लौट पाएंगे।
इसलिए एक अनुकूल माहौल पैदा करने की जरूरत है। साथ ही जिन आतंकवादियों ने शोपियां में हत्या की है उसे सरेआम फांसी दी जानी चाहिए ताकि दोबारा इंसानियत का क़त्ल करने के बारे में कोई नहीं सोचेगा। एक अन्य प्रदर्शनकारी जावेद बेग ने कहा कि कश्मीर के लोग ऐसी हत्याओं के खिलाफ हैं जो हो रही हैं।
यह सब पाकिस्तान और उनके सहयोगियों के इशारे पर किया जा रहा है। वे नई दिल्ली में पाकिस्तान दूतावास और संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। आज के विरोध से पाकिस्तान और हुर्रियत नेताओं की आंखें खुल जानी चाहिए। इस्लाम हमेशा मानवता का संदेश फैलाता है।
एपीएचसी द्वारा शोपियां हत्या को लेकर बयान जारी कर की गई निंदा के जवाब में बेग ने कहा, वे (हुर्रियत) बयान जारी कर केवल जुबानी बातें कर रहे हैं। उन्हें इन हत्याओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना चाहिए था। प्रदर्शनकारियों में से एक ने कहा कि हुर्रियत कार्यालय को जल्द ही बंद कर दिया जाएगा और इमारत में एक अनाथालय चलाया जाएगा।
एक अन्य प्रदर्शनकारी कश्मीरी पंडित ने कहा कि कश्मीर के लोगों ने महसूस किया है कि वे शांति चाहते हैं न कि रक्तपात। ज्ञात हो कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख नेता या तो जेल में हैं या नजरबंद हैं, जिनमें इसके अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारूक भी शामिल हैं, जो अपने नगीन आवास पर नजरबंद हैं। जिस कार्यालय में सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया गया, उसका 2018 से हुर्रियत द्वारा उपयोग नहीं किया जा रहा है। हालांकि, यह पार्टी मुख्यालय था जहां सभी बड़ी बैठकें होती थीं।
24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे जेकेएएडीपी के सदस्य
इस बीच जम्मू-कश्मीर आल अलायंस डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेएएडीपी) के सदस्य भी कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाने को लेकर श्रीनगर की प्रेस एन्क्लेव में 24 घंटे के लिए भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जेकेएएडीपी के मीडिया प्रभारी मोहम्मद एजाज ने कहा कि हम बेगुनाह हत्याओं के खिलाफ आज भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
पिछले तीन दशकों से कश्मीरी मर रहा है चाहे वो कश्मीरी मुसलमान है, सिख है या फिर कश्मीरी पंडित है। उन्होंने कहा कि हम कड़ी निंदा करते हैं और एलजी हकूमत से अपील है कि जो यह ‘अज्ञात बंदूकधारी’ पिछले तीन दशकों से घूम रहे हैं इन्हें बेनकाब करें। ऐसी एक व्यवस्था बनाएं ताकि इन सब हत्याओं में इंसाफ मिल सके।
शनिवार से ही चल रहा है विरोध प्रदर्शन
कश्मीरी पंडित की हत्या के विरोध में शनिवार से कश्मीर भर में गैर सरकारी संगठनों, नागरिकों और भाजपा के सदस्यों द्वारा कई विरोध प्रदर्शन किए गए। रविवार को भी कुछ जगहों पर घाटी में कैंडल मार्च भी निकाले गए। जम्मू में भी इसके खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ था। सभी दलों ने भी घटना की निंदा की थी।