लोगों का आरोप-रजिस्टर में गलत चढ़ाया रोजनामा, अधिकारी बोले-दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार ही दी जाती है सप्लाई
-ब्यासपुर परलाह के लोगों ने घेरा बिजली दफ्तर, कर्मचारियों से कहासुनी
-कहा-20 दिन से 5 से 6 घंटे ही आ रही बिजली, सप्लाई बहाल होने पर हुए शांत
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। अघोषित बिजली कटौती पर शनिवार को लोगों में गुस्से का करंट दौड़ गया। व्यासपुर परलाह गांव के लोगों ने बिजली दफ्तर ब्यासपुर का घेराव किया। कर्मियों से कहासुनी हो गई। लोगों का आरोप था कि शुक्रवार रात 10 मिनट ही बिजली दी। विभाग ने रोस्टर में 3 घंटे लिख दिया। वहीं, अधिकारी का कहना था कि सप्लाई रोस्टर के अनुसार ही दी जाती है।
ग्रामीण दिलीप सिंह, जगीर सिंह, गारू राम, यशपाल, पुरुषोत्तम कुमार, अनिल कुमार ने बताया कि शुक्रवार सुबह से शनिवार सुबह तक बिजली नहीं आई। जबकि, अन्य गांवों में बिजली सुचारू थी। कारण जानने शनिवार सुबह दफ्तर गए। रोस्टर पूछने पर कर्मचारी ने बताया कि शुक्रवार रात 9 से 12 तक बिजली सप्लाई सुचारू थी। इस पर ग्रामीण भड़क गए। बोले-इस दौरान तो मात्र 10 मिनट बिजली आई। ग्रामीणों व कर्मचारियों में कहासुनी हो गई। 60 से 70 ग्रामीणों ने दफ्तर का घेराव कर दिया। विभाग पर मनमर्जी का आरोप लगाकर नारेबाजी की। कर्मियों की सूचना पर अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया। कहा कि कई बार 33 केवी में तकनीकी खराबी के चलते बिजली बंद रहती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सिफारिश के अनुसार बिजली आपूर्ति की जा रही है। तीन घंटे के बवाल के बाद बिजली सुचारू होने पर ग्रामीण शांत हुए।
पंच दर्शन कुंडल ने कहा कि करीब 20 दिन से 5 से 6 घंटे ही बिजली आ रही है। बिजली दफ्तर में पूछते हैं तो कर्मचारी सही ढंग से बात नहीं करते। अब सोमवार को जम्मू में चीफ इंजीनियर के दफ्तर के बाहर धरना देंगे। अधिकारी को बिजली की समस्या से अवगत करवाएंगे।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर भी निकाली भड़ास
मामले में साथ न देने पर ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर भी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि सूचित करने पर भी 3 पंच ही पहुंचे। जबकि, सरपंच को भी विशेष सूचना दी थी, लेकिन समस्या के समाधान में साथ नहीं आए। पहले भी कई बार जनप्रतिनिधियों के समक्ष मामला रख चुके हैं। उधर, सरपंच का कहना था कि देरी से सूचना मिली थी।
सिंचाई न होने से सूखे की चपेट में धान की फसल
ग्रामीणों ने कहा कि बिजली सुचारू नहीं आने से खेत में पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। धान की फसल सूखे की चपेट में है। नहरों में पानी की आपूर्ति पहले से नहीं है। पंप सेट से ही सिंचाई करनी पड़ती है, लेकिन फसल को पानी न मिलने से दाने काले होने लगे हैं।
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रजिस्टर में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार ही बिजली सप्लाई दी जाती है। 33 केवी में तकनीकी खराबी होने पर रिसीविंग स्टेशन के आगे लाइनों में खराबी आती है तो उसे दर्ज नहीं करते। न ही उसके बारे में पता चलता है। वहीं, रिसीविंग स्टेशन पर लोड काफी ज्यादा है। इससे बार-बार बिजली कटौती करनी पड़ रही है।
हरप्रीत सिंह, जूनियर इंजीनियर, बिजली विभाग