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सही समाचार की पहचान के लिए आवश्यक है तथ्यों की बार-बार जांच करना : डॉ. अर्चना

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- भारतीय जनसंचार संस्थान, जम्मू में ‘तथ्यों की जांच’ पर कार्यशाला का सफल आयोजन
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जम्मू। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), जम्मू में सोमवार को तथ्यों की जांच विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के मीडिया अध्ययन केंद्र की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्चना कुमारी रहीं।
कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों और मीडिया पेशेवरों को आज के जटिल मीडिया परिदृश्य में गलत सूचना की पहचान, सत्यापन और मुकाबला करने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण कौशल से लैस करना रहा। कार्यक्रम के संरक्षक के रूप में संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक, डॉ. दिलीप कुमार रहे। संयोजक के रूप में डॉ. रविया गुप्ता और उप संयोजक के रूप में अकादमिक एवं शिक्षण सहयोगी राजीव कुमार और गुलशन कुमार उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. दिलीप कुमार के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद, डॉ. रविया गुप्ता ने मुख्य अतिथि डॉ. अर्चना कुमारी का औपचारिक परिचय कराते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से सभी को अवगत कराया। इस कार्यशाला में डॉ. अर्चना ने मीडिया में भ्रामक और गलत समाचारों के फैलने की समस्या पर गहन चर्चा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारिता के क्षेत्र में तथ्य जांच करना क्यों आवश्यक है और भ्रामक समाचार समाज पर किस प्रकार प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
उन्होंने कई उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को तथ्य जांच की विभिन्न विधियों के बारे में बताया और सही समाचार की पहचान करने के लिए आवश्यक तकनीकों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इसके लिए तथ्यों को अलग-अलग सूत्र से जांच करना आवश्यक है।
उन्होंने मीडिया की कई प्रमुख चुनौतियों जैसे गलत सूचना, लोकल न्यूज की गुणवत्ता, समावेशी पत्रकारिता और तकनीकी बदलावों पर चर्चा की। खासतौर पर उन्होंने सोशल मीडिया के लोकतांत्रिक स्वरूप और उसकी खामियों की ओर भी इशारा किया, जिसमें क्षेत्रीय भाषाओं में फैलने वाली गलत सूचनाओं पर जोर दिया और इनके रोकथाम के लिए कुछ उपाय भी सुझाए।
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फेक न्यूज के खतरनाक परिणामों पर बात करते हुए डॉ. अर्चना ने बताया कि कैसे व्हाट्सएप फॉरवर्ड से गलत सूचनाएं समाज में भयावह घटनाओं, जैसे कि चाइल्ड ट्रैफिकिंग और मॉब लिंचिंग का कारण बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मिसइन्फॉर्मेशन के प्रसार से पत्रकारिता की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। आईआईएमसी जम्मू में दोपहर बाद स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने स्टाफ सदस्यों के साथ मिलकर श्रमदान भी किया। इसके तहत परिसर की सफाई की गई।
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