लगातार दूसरे साल टूरिस्ट वाहन चालकों की रोजीरोटी पर संकट बन गया है। घाटी के ताजा हालात ने चालकों की कमर तोड़ दी है। कश्मीर जाने पर पत्थर बरसाए जा रहे हैं। इससे कोई पर्यटक घाटी जाने की हिम्मत नहीं कर रहा। इसकी वजह से चालकों के पास कोई काम नहीं है। कश्मीर जाने पर वाहनों को तोड़ा जा रहा है, जिससे चालकों में भी रोष है।
बस स्टैंड, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और कटड़ा से घाटी के लिए 5000 से अधिक टूरिस्ट वाहन चलते हैं। टूरिस्ट वाहन एसोसिएशन से 1200 वाहन जुड़े हैं, लेकिन घाटी जाने के लिए चालकों को पर्यटक नहीं मिल रहे। एसोसिएशन के प्रधान अंचल सिंह का कहना है कि पिछले साल जब पीक सीजन था तो घाटी में हालात खराब हुए और उनका सीजन पूरा बेकार चला गया।
इस साल भी पीक सीजन में हालात खराब की वजह से उनके पास कोई पर्यटक नहीं आ रहा। उनके वाहन स्टैंड पर ही खड़े हैं। अब अमरनाथ यात्रा से ही उन्हें उम्मीद है, लेकिन जिस तरह के हालात हैं, उसमें तो यात्री भी नहीं आएंगे। पिछले वर्ष भी खराब हालात की वजह से हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया गया। इस साल भी अभी तक कुछ नहीं किया गया। चालकों के लिए वाहनों की किश्तें निकालना मुश्किल हो गया है। ऊपर से सरकार ने ट्रांसपोर्ट से जुड़े सभी तरह के शुल्क बढ़ा दिए हैं, जिससे और कमर टूट गई है।
घाटी में जम्मू से जाने वाले जम्मू नंबर के वाहनों पर कश्मीर में लगातार पथराव किया जा रहा है। सोमवार को इंदिरा चौक में कई चालकों ने प्रदर्शन किया। चालकों का आरोप है कि घाटी में वाहनों को तोड़ा जा रहा है। चालकों से मारपीट की जा रही है। जम्मू वापस भेजा जा रहा है। जानबूझकर जम्मू के चालकों को निशाना बनाया जा रहा है। सरकार चालकों को सुरक्षा मुहैया कराए।