श्रीनगर। कोरोना के मामलों में वृद्धि घाटी में पर्यटन क्षेत्र के लिए गंभीर साबित हुई है। नए साल पर आशाजनक पर्यटन सीजन की उम्मीद लग रही थी, लेकिन संक्रमण बढ़ने के साथ ही कश्मीर आने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है। होटलों में 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो गई। पर्यटन विभाग के अनुसार दिसंबर 2021 में 1.42 लाख पर्यटक कश्मीर पहुंचे थे, लेकिन जनवरी के पहले सप्ताह से ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण तीसरी लहर चरम पर पहुंचने के साथ कश्मीर में पर्यटकों की आमद को बड़ा झटका लगा है। जनवरी में अब तक केवल 40,000 पर्यटक ही घाटी घूमने आए हैं। यह पर्यटकों के आगमन के मामले में बीते एक दशक में सबसे तेज गिरावट का महीना है।
ट्रैवल्स एजेंट एसोसिएशन ऑफ कश्मीर (टीएएके) के अध्यक्ष फारूक कुठू ने कहा कि तीसरी लहर से 50 प्रतिशत बुकिंग रद्द हुई है, जिससे काफी नुकसान पहुंचा। हालांकि गुलमर्ग में अब भी करीब 70 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी है, लेकिन पहलगाम, सोनामर्ग आदि जगहों की बुकिंग लगभग पूरी तरह से प्रभावित हुई है। कुठू ने बताया कि साल की शुरुआत अच्छी रही और फरवरी तक होटलों में एडवांस बुकिंग थी, लेकिन कोविड के मामलों में वृद्धि ने सब बिगाड़ दिया। अभी थोड़ी उम्मीद जगी है, क्योंकि विशेषज्ञों ने कहा है कि फरवरी के अंत से मामले कम होना शुरू हो जाएंगे। इसको ध्यान में रखते हुए बीते 2-3 दिन से फरवरी अंत और मार्च के लिए कुछ बुकिंग हुई हैं।
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नुकसान की भरपाई के लिए ठोस योजना तैयार
कश्मीर पर्यटन विभाग के निदेशक डॉ. जीएन इटू ने कहा कि कोरोना के चलते पर्यटन क्षेत्र कुछ ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है, लेकिन जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई के लिए विभाग ने ठोस योजना तैयार की है। उन्होंने कहा, अकसर कश्मीर घूमने के लिए अमूमन इस समय महाराष्ट्र, गुजरात, कोलकाता, दिल्ली आदि से पर्यटक आते हैं, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तीसरी लहर ने सबसे पहले इन्हीं राज्यों को प्रभावित किया, जिससे वहां लॉकडाउन लगाना पड़ा। इससे पर्यटन में कमी आई। बीते महीनों के मुकाबले में जो उम्मीदें थीं, भले ही वैसा नहीं है, लेकिन जिस तरह से विशेषज्ञ बता रहे हैं कि फरवरी के अंत तक तीसरी लहर में गिरावट आएगी तो उम्मीद है कि इन राज्यों से पर्यटकों की आमद भी शुरू होगी। स्प्रिंग सीजन जिसे केवल ट्यूलिप फेस्टिवल तक सीमित रखा जाता था, उसको इस बार बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा। इसकी शुरुआत बादाम वारी फेस्टिवल के साथ होगी। मार्च के शुरू में बादाम के फूल, वाइट ट्यूलिप आदि खिल जाते हैं और उस समय जो भी पर्यटक यहां आएंगे, एक अलग अनुभव करेंगे।
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अगर ऐसा ही रहा तो वेतन देना भी मुश्किल होगा
श्रीनगर में एक कैफे चला रहे इकरा रफीकि ने बताया कि हमारे लिए काम करने का समय सप्ताहांत (वीकेंड) होता था, लेकिन कोरोना के चलते सप्ताहांत पाबंदियों ने सब काम बिगाड़ दिया। उन्होंने कहा कि उनके कैफे में करीब 12 कर्मचारी हैं और अगर ऐसा ही चलता रहा तो उनको वेतन देना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि काम में काफी गिरावट आई है, प्रशासन को कोई ठोस योजना बनानी चाहिए, जिससे किसी का भी नुकसान न हो और कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाई जा सके। इकरा के अनुसार वह सरकार का हर तरह से सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
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सप्ताहांत पाबंदियों से भी नहीं आ रहे पर्यटक
पटनीटॉप में होटलों में 30 फीसदी तक बुकिंग रद्द
जम्मू। संभाग के प्रमुख पर्यटन स्थल पटनीटॉप में पाबंदियां लागू होने से पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। कोविड प्रोटोकाल के तहत ही पर्यटकों को यहां आने की अनुमति दी जा रही है। लेकिन इन परिस्थितियों में बड़ी संख्या में पर्यटक आने की अपनी सोच बदल रहे हैं। पटनीटॉप में होटल कारोबारी राजेश ठाकुर, सुभाष चंद्र ने बताया कि जनवरी में 20-30 फीसदी तक होटलों की बुकिंग रद्द हुई है और पाबंदियों के कारण खासतौर पर बाहर से पर्यटक नहीं आ रहे हैं। हालांकि संभाग में शुक्रवार को पाबंदियों की घोषणा के बावजूद सब कुछ खुला रखा गया, लेकिन पूर्व की सूचना के आधार पर पर्यटक नहीं आ रहे हैं। आल जम्मू होटल एंड लगेज एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता ने कहा कि सप्ताहांत पाबंदियों से होटल व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित है। बाहर से पर्यटक पूछते हैं कि आपके यहां शुक्रवार से पाबंदियां है तो हम क्या आकर करेंगे, जबकि जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि जम्मू में ही 5 से 10 फीसदी ही होटल व्यवसाय रह गया है। सरकार को खासतौर पर पाबंदियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसमें पर्यटकों के लिए राहत से जुड़ी पाबंदियां होनी चाहिए, ताकि वे आसानी से यहां पहुंच सकें।