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फाइलों में अटका जम्मू हेबिटेट सेंटर, चार साल से रुकी डीपीआर

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जम्मू। जम्मू शहर में एक ही जगह लोगों को पार्किंग, पार्क, होटल, क्लब, रेस्तरां जैसी सुविधाएं दी जानीं हैं। इसके लिए हैबिटेट सेंटर बनाया जाना है, लेकिन यह प्रोजेक्ट चार साल से फाइलों में ही अटका है। धरातल पर कुछ नहीं हो पा रहा। 2016 से प्रोजेक्ट की डीपीआर फाइनल करवाने का ही काम चल रहा है। हर बार डीपीआर में कोई न कोई अड़चन आती है, इन्हें ठीक कर द्वारा भेजा जाता है, लेकिन अभी तक आईआईटी रुड़की से डीपीआर को हरी झंडी नहीं मिल पाई है। इस प्रोजेक्ट पर जम्मू डेवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) द्वारा 400 करोड़ से ज्यादा राशि खर्च की जानी है।
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इसके अलावा वन, खनन और अन्य विभागों से भी एनओसी मिलने का इंतजार हो रहा है। अभी तक विभागों से भी हरी झंडी नहीं मिल पाई है। साल 2019 में प्रोजेक्ट में आईआईटी रुड़की की ओर एनओसी लेने के लिए आपत्ति जताई थी। इसके बाद एनओसी के लिए आवेदन किया था। हेबिटेट सेंटर बनने से शहर में विकास होना है। यहां पर एक साथ दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर सुविधाएं लोगों को मिलनी है।
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सौ कनाल में तैयार किया जाएगा प्रोजेक्ट
विक्रम चौक से तवी चौथे पुल तक 100 कनाल जमीन में प्रोजेक्ट पर काम होना है। यहां पर भूमि को अधिग्रहण किया जाना है। भूमि को समतल करने के बाद प्रोजेक्ट के मैप के अनुसार काम होना है। इसमें लोगों को अत्याधिक सुविधाएं दी जानी हैं। पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जाना है।
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विक्रम चौक में रहने वाले लोग होने हैं सांबा शिफ्ट
प्रोजेक्ट में काम शुरू करने से पहले वेयर हाउस को सांबा में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए निशानदेही तक हो चुकी है। रिहायशी इलाकों के लोग को भी सांबा में बसाया जाना है। जेडीए द्वारा इसकेे लिए कार्रवाई पूरी कर ली गई है।
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तवी नदी फ्रंट के निर्माण से लगने हैं चार चांद
तवी नदी फ्रंट के निर्माण से भी जम्मू हेबिटेट सेंटर की खूबसूरती बढ़ेगी। साथ ही कृत्रिम झील निर्माण के लिए भी डीपीआर फाइनल करवाने पर काम चल रहा है। पहले तीनों प्रोजेक्टों पर काम एक साथ करने पर भी योजना बनी थी, लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाई।
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प्रोजेक्ट की डीपीआर फाइनल करवाने पर काम चल रहा है। फाइनल होने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। अभी तक कोई भी मंजूरी नहीं मिली है। संपर्क किया जा रहा है।
- सुशील कुमार, एर्क्सईएन, जेडीए
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