जम्मू। प्रदेश की लोक संस्कृति और साहित्य को अपनी लेखनी से जिंदा रखने वाले प्रदेश के साहित्यकार सरकार की उदासीनता से निराश हैं। विभिन्न भाषाओं के लेखक तीन वर्ष से अपनी पुस्तक के प्रकाशन के लिए जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी से सब्सिडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं सर्वश्रेष्ठ पुस्तक पुरस्कार और वरिष्ठ साहित्यकारों के पेंशन से संबंधित मामले भी तीन वर्षों से अटके हुए हैं।
साहित्यकारों के मुताबिक सरकार की घोषणा के कई सालों तक साहित्यकारों को सम्मान नहीं मिला पाता है। प्रदेश का सांस्कृतिक विभाग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में भी विभाग ने साहित्यकारों को प्रोत्साहन राशि देना जरूरी नहीं समझा। अकादमी डोगरी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू, गोजरी, पहाड़ी आदि भाषाओं की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए साहित्यकारों को सब्सिडी देती है, लेकिन अभी तक नहीं दी गई। करीब 30 करोड़ रुपये अटके हुए हैं लेकिन सांस्कृतिक विभाग मौन है।
वरिष्ठ लेखिका और साहित्य अकादमी में डोगरी सलाहकार बोर्ड की सदस्य डॉ. सुनीता सिंह भडवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह रवैया निराशाजनक है। अकादमी में स्थायी सचिव की नियुक्ति नहीं होने से साहित्यकारों को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कोट
यह मामला कल्चरल सेक्रेटरी के अधीन आता है। जब हमने कल्चरल सेक्रेटरी मुनीर उल इस्लाम से बात की तो उन्होंने कहा कि हमने सभी औपचारिकताएं पूरी करके सचिवालय को फाइल भेज दी है। अब तक वहां से इस संबंध में कोई आदेश नहीं आया। मंजूरी मिलते ही साहित्यकारों की मांगें पूरी कर दी जाएंगी।
-जुबेर अहमद, कमिश्नर सेक्रेटरी, कल्चरल डिपार्टमेंट