लांकडाउन के कारण महिला पैदल अपने गंतव्य को जाती हुई।
जम्मू। जम्मू शहर में मथुरा उत्तर प्रदेश से आए बीस मजदूर तीनों से भूखे रहे हैं, मगर प्रशासन, नगर निगम या फिर पुलिस विभाग ने उनकी सुध नहीं ली। हालांकि इन विभागों की ओर से बड़े बड़े दावे प्रवासी मजदूरों के लिए किए जा रहे हें मगर धरातल पर कुछ होता नजर नहीं आ रहा है। गंगयाल में केबल तार बिछाने के काम के लिए मथुरा से बीस मजदूरों को बुलाया गया। लाकडाउन शुरू होते ही मजदूरों से काम छीन गया। उनके पास न तो पैसे न कमरे का किराया देने को कहा।
जो थोड़ा बहुत कंपनी से मिला था वो भी खर्च कर लिया। इस कारण बीते तीन दिनों से मजदूरों के पास पैसे न होने के कारण वे भूख रहे। वहीं, दूसरा चौकाने वाली बात यह सामने आई कि एक तरफ प्रशासन सोशल दूरी बनाए रखने को कह रही है। वहीं, एक कमरे में बीस मजदूरों के रहने से तमाम नियम भी टूट गए हैं।
जिला प्रशासन के सर्वे करवाने का दावा भी निकाला झूठा
जिला प्रशासन की ओर से प्रवासी मजदूरों के लिए विशेस सर्वे करवाने और राशन बांटने के दावे किया जा रहे हैं मगर दावे हवा हवाई ही साबित हो रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि अभी तक कोई भी टीम उनके पास नहीं पहुंच पाई है। विपरीत परस्थितियों उनके किराया अदा करना मश्किल हो गया है। उनके पास खाने के लिए पैसे नहीं है। तीन दिनों से कुछ नहीं खाया। पानी पीकर ही सो रहे हैं। कंपनी के अधिकारी उनका फोन नहीं उठा रहे हैं। इस कारण उन्हें परेशानी पेश आ रही है। कंपनी ने शहर में केबल बिछाने के काम के लिए यूपी से लाया था अब छोड़ कर चले गए हैं। कोई सुध नहीं ले रहा है।
मौके पर जाकर देखा तो मजदूर थे तीन दिन से भूखे
हेल्थ एंड सैनिटेशन कमेटी के अध्यक्ष बलदेव सिंह बलौरिया को रविवार को इसकी सूचना मिली। उन्होंने मौके पर जाकर देखा। हालत काफी दयनीय थी। उन्होंने कहा कि फिलहाल हर गरीब मजदूरों को 15 किलो आटा और दस किलो चावल के अलावा नमक, मिर्च, मसाले, सरसो का तेल, हलदी वितरित की गई है। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी ने इनकी सुध नहीं ली है। तीन दिनों से मजदूरों ने कुछ नहीं खाया था। उन्हें सूचना मिली थी कि एक कमरे में बीस मजदूर रह रहे हैं। सोशल दूरी के नियमों की अवहेलना रोकने के लिए गए थे। जाकर देखात तो स्थिति कुछ ओर ही है। अन्य मजदूरों की दूसरी जगह पर रहने की व्यवस्था की जाएगी।