जम्मू। उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बीते सप्ताह जीएमसी में 100 बेड वाले नए इमरजेंसी ब्लॉक का लोकार्पण किया, लेकिन अब तक इसमें लिफ्ट शुरू नहीं की गई। स्ट्रेचर पर मरीजों को तीसरी मंजिल तक पहुंचाने में तीमारदारों की सांसें फूल रहीं हैं। पुरानी इमरजेंसी में भी एकमात्र लिफ्ट खराब होती रहती है। दोनों इमरजेंसी ऊपर के फ्लोर से एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई हैं। जीएमसी प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन ने कहा कि नई इमरजेंसी में लिफ्ट शुरू होने में अभी एक माह लग जाएगा।
तीन मंजिला नए इमरजेंसी ब्लॉक में प्रत्येक मंजिल पर 32-32 बेट स्थापित किए गए हैं। हालांकि वर्तमान में पुरानी इमरजेंसी पर मरीजों का लोड बढ़ने पर ही प्रतिदिन 8-10 मरीजों को यहां भेजा जा रहा है, लेकिन कोविड की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए भविष्य में इमरजेंसी को और मजबूत बनाने की जरूरत है। नए ब्लॉक में ग्राउंड से तीसरे फ्लोर तक रैंप का निर्माण किया गया है, लेकिन अभी तक लिफ्ट शुरू न होने से रैंप के सहारे मरीजों को ऊपर के फ्लोर तक पहुंचाना पड़ रहा है। करोड़ों की लागत से तैयार किए गए नए इमरजेंसी ब्लॉक में उद्घाटन से पहले लिफ्ट को शुरू किया जाना चाहिए था।
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स्ट्रेचर भी पड़े खराब
इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर भी खस्ताहाल हैं, अधिकांश के पहिए टूटे या खराब हो चुके हैं, जिससे मरीज को इनके सहारे रैंप से ऊपर के फ्लोर तक पहुंचाने में तीमारदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। पहिए खराब होने पर स्ट्रेचर को आगे से उठाकर बढ़ाना पड़ता है। विशेषतौर पर मरीज के साथ आई महिला तीमारदार के लिए यह प्रक्रिया मुसीबत बन जाती है। पुराने इमरजेंसी ब्लॉक में रैंप न होने के कारण वहां लिफ्ट खराब होने पर मरीजों को ऊपर के फ्लोर तक पहुंचाने के लिए नई इमरजेंसी के रैंप का सहारा लिया जा रहा है।