पहले और दूसरे चरण में भारी मतदान कर कश्मीर के अवाम ने आतंकी धमकियों और अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार की काल को सिरे से खारिज कर दिया।
पर दूसरे चरण में कुलगाम विधानसभा क्षेत्र के चार गांवों के लोगों ने बहिष्कार का फैसला किया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनके इस फैसले से अलगाववादियों की काल और आतंकी धमकियों का कोई लेना देना नहीं है।
बगाम मतदान केंद्र के बाहर खड़े एक बुजुर्ग अली मोहम्मद का कहना था कि उनके गांव के लोगों के चुनाव बहिष्कार करने के फैसले से अलगाववादियों की काल का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने बीते 18 वर्षों से उनके गांव की अनदेखी किए जाने के विरोध में यह फैसला लिया है।
उन्होंने बताया कि मात्र चार हजार की आबादी वाले पास के ही गांव बलोसा को सब तहसील का दर्जा दे दिया गया है। जबकि उनके गांव की आबादी 15 हजार से अधिक है फिर भी उनके गांव की अनदेखी की गई।
एक अन्य ग्रामीण अब्दुल गफ्फार का कहना था कि वे गांव के मीडिल स्कूल को हाई स्कूल का दर्जा दिलाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव की लगातार अनदेखी की गई है।