जम्मू। भूकंप की सबसे ज्यादा खतरे वाली श्रेणी में आने वाले जम्मू-कश्मीर को बड़े भूकंप की स्थिति से निपटने की तैयारी करनी होगी। प्रदेश में पिछले छह माह में 3-4 की तीव्रता वाले पांच भूकंप आ चुके हैं। पुराने इतिहास और हाल के दशकों में आए भूकंप के ट्रेंड समेत भूगर्भीय हलचल पर आधारित अध्ययन यहां बड़े भूकंप के खतरे की ओर संकेत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर चूंकि सिस्मिक जोन 4 और 5 में आता है। यहां 8 या इससे अधिक की तीव्रता का भूकंप भी आ सकता है, जबकि निर्माण में भूकंप रोधी पहलु नदारद है। भूकंप रोधी निर्माण मानकों को सख्ती से लागू करना बेहद जरूरी है। जम्मू विश्वविद्यालय में ज्योलॉजी विभाग के प्रोफेसर जीएम भट्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर में मेन और सेंट्रल बाउंडरी थ्रस्ट सक्रिय हैं। मेन बाउंडरी थ्रस्ट जम्मू संभाग से शुरू होकर हिमाचल तक जाता है, जबकि सेंट्रल बाउंडरी थ्रस्ट रामबन जिले से हिमाचल तक जाता है। यह दोनों ही थ्रस्ट प्लेट समान हैं जो एक ही दिशा में स्थापित हैं। हिमाचल के निर्माण के समय से ही इसकी संरचना ऐसी है कि पूरे इलाके में फील्ड और फाल्ट बने हुए हैं। जम्मू-कश्मीर टेकटॉनिक प्लेट पर टिका है, जिसमें बड़ा दबाव पड़ने पर भूकंप आता है। प्रो. भट्ट ने कहा कि बीती रात आए भूकंप का केंद्र ताजिकिस्तान में था। यदि पाकिस्तान से उत्तराखंड की ओर 6 की तीव्रता से भी भूकंप आता है तो इसका जम्मू-कश्मीर पर अधिक प्रभाव होगा। जम्मू-कश्मीर में ज्यादातर भूकंप जमीन की ज्यादा गहराई में नहीं आ रहे। यह स्थिति ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली होती है।
बांध परियोजनाओं का भविष्य में पड़ेगा असर
प्रो. भट्ट के अनुसार चिनाब घाटी क्षेत्र में पनबिजली के लिए बड़े-बड़े बांध बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में इसका भूकंप से कोई ताल्लुक नहीं है, लेकिन आने वाले समय में परिस्थितियां अलग होंगी। उन्होंने कहा कि भूकंप सीधे तौर पर जनहानि नहीं करता, जबकि ढांचे गिराकर तबाही मचाता है। चिनाब घाटी भूकंप की संवेदनशील श्रेणी में है, ऐसे में बड़े भूकंप से बांध टूटने से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे होने वाले नुकसान की कल्पना की जा सकती है।
भूकंप की तबाही क्षेत्र पर भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है
भूकंप से नुकसान उसके प्रभाव क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करता है। किश्तवाड़ में वर्ष 2013 में 5.7 तीव्रता वाला भूकंप आया था, लेकिन भौगोलिक स्थिति के हिसाब से वहां करीब 46 हजार छोटे बड़े निर्माण ढांचों को नुकसान पहुंचा था। जम्मू-कश्मीर में वर्ष 1885 में 6.2, 2005 में 7.6 और वर्ष 1555 में 8 की तीव्रता वाला भीषण भूकंप आ चुका है।