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Jammu News: श्रीनगर का सेंटूर होटल निजी फर्म को सौंपने की तैयारी, निगरानी के लिए बनी समिति

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श्रीनगर। शहर का मशहूर सेंटूर लेक व्यू होटल निजी कंपनी लागो व्यू श्रीनगर प्राइवेट लिमिटेड को सौंपने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो पूरे हस्तांतरण की निगरानी करेगी।
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सरकार के आदेश के मुताबिक, इस समिति की अगुवाई कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर करेंगे। साथ ही श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर, लोक निर्माण, जल शक्ति, बिजली, बागवानी, संस्कृति और अन्य विभागों के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। समिति का काम यह देखना होगा कि होटल का जिम्मा तय समय पर और तय नियमों के अनुसार निजी कंपनी को सौंपा जाए। इसके लिए हर विभाग को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां दी गई हैं।
सरकारी संपत्तियों का होगा दोबारा उपयोग : सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में देकर बेहतर प्रबंधन और राजस्व बढ़ाने की योजना है। सिर्फ सेंटूर ही नहीं, श्रीनगर का टटू ग्राउंड और पहलगाम क्लब जैसी संपत्तियां भी इसी योजना के तहत निजी कंपनियों को सौंपी जा सकती हैं।
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इन विभागों को मिली जिम्मेदारी
राजस्व विभाग: होटल की जमीन और उससे जुड़े कागजात तैयार करेगा।
लोक निर्माण विभाग: होटल के भीतर मौजूद सामान की सूची बनाएगा और जरूरी सिफारिशें देगा।
संस्कृति विभाग: होटल में रखी गई ऐतिहासिक चीजों और पेंटिंग्स की लिस्ट तैयार करेगा।
बागवानी विभाग: परिसर में लगे पेड़ों का रिकॉर्ड रखेगा।
जल शक्ति और बिजली विभाग: पानी-बिजली कनेक्शन और मीटर रीडिंग का विवरण तैयार करेंगे।
नगर निगम और झील प्राधिकरण: सीवरेज, डल झील तक पहुंच और भवन की स्थिति का दस्तावेज तैयार करेंगे।
इसके अलावा, रॉयल स्प्रिंग्स गोल्फ कोर्स और वन विभाग को अपने परिसर में बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करने में मदद करनी होगी।
पर्यटन विभाग को पूरी प्रक्रिया की निगरानी, विभागों के बीच समन्वय और पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
होटल का इतिहास
1984 में शुरू हुआ सेंटूर लेक व्यू होटल राज्य सरकार और होटल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एचसीआई) का संयुक्त उपक्रम था। इसे 99 साल के पट्टे पर एचसीआई को दिया गया था। डल झील के किनारे बने इस होटल में कभी देश-विदेश के पर्यटक ठहरते थे, लेकिन 1990 के दशक में इसका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों की रिहाइश के तौर पर होने लगा।

होटल बना था अस्थायी जेल
5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सरकार ने कई बड़े नेताओं को हिरासत में लिया था। उस समय इस होटल को अस्थायी जेल बना दिया गया था। होटल के एक पूर्व कर्मचारी ने बताया कि तक करीब 50 कमरे नेताओं के लिए बुक किए गए थे।

सरकारी संपत्तियों का होगा दोबारा उपयोग
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में देकर बेहतर प्रबंधन और राजस्व बढ़ाने की योजना है। सिर्फ सेंटूर ही नहीं, श्रीनगर का टटू ग्राउंड और पहलगाम क्लब जैसी संपत्तियां भी इसी योजना के तहत निजी कंपनियों को सौंपी जा सकती हैं।
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