बिजली निगम में कार्यरत लाइनमैनों के पास सुरक्षा किट नहीं है। करंट लगने से मौतें हो रही या फिर कर्मी दिव्यांग हो रहे हैं। बड़ी घटना के बाद आलाधिकारी सुरक्षा किट मुहैया करवाने का दावा करते हैं जो तबादले के साथ चले जाते हैं। इस बार दो करोड़ का प्रस्ताव सरकार को भेजा है।
आंकड़ों को देखें तो 1995 से अब तक 90 कर्मचारियों की मौतें हो चुकी है जबकि 180 कर्मचारी घायल हो चुके हैं। हर साल औसतन तीन से चार मौतें हो रही हैं, क्योंकि बारिश के मौसम में भी बिना दस्तानों के तारों को जोड़ना पड़ रहा है। जान जोखिम में रखकर कर्मचारी काम कर रहे हैं। लाइनमैनों को जूते, दस्ताने, हेल्मेट, जैकेट सहित अन्य सुरक्षा उपकरण की जरूरत है।
हैरत की बात यह है कि बिजली बंद होने की जानकारी अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक होती है, इसके बावजूद कैसे करंट लगने के मामले आ रहे हैं। हर बार करंट लगने के मामलों में बढ़ोतरी होने पर सुरक्षा सामग्री वितरित करने को कहा जाता है और स्थिति सामान्य होने पर कुछ नहीं मिल पाता।
कर्मचारियों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। मौतों के ग्राफ में बढ़ोतरी हो रही है। सुरक्षा किट नहीं है।
- अखिलेश सिंह, अध्यक्ष, पीडीएल, टीडीएल, डेलीनीड वर्कर यूनियन
सरकार कर्मचारियों को सुरक्षा किट प्रदान करे। साथ ही करंट लगने के बाद घायल या मृतक के परिजनों को मुआवजा दिया जाए।
- सचिन टिक्कू, अध्यक्ष इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट एसोसिएशन
बिजली कर्मचारियों को सुरक्षा किट मुहैया करवाई जाएगी। दो करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी के बाद खरीद होगी और किट वितरित किए जाएंगे।
- शिव अनंत त्याल, एमडी, बिजली निगम