शहर और आसपास के क्षेत्रों में शनिवार की शाम पांच बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश से जहां एक तरफ तापमान में काफी गिरावट महसूस की गई तो वहीं दूसरी तरफ जिले के पहाड़ी क्षेत्रों के लोग एक बार फिर से सहम उठे। शहर में सुबह से ही आसमान में बादलों और सूर्य के बीच आंख मिचौली होती रही। शाम को अचानक बादलों के गरजने के साथ तेज और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई।
तेज बारिश ने एक बार फिर लोगों को बाढ़ के रूप में प्रकृति के कहर की याद दिला दी। उधर, जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में तेज और मूसलाधार बारिश के साथ ओलों ने लोगों की चिंता और भी बढ़ा दी है। जिले के बुद्धल, दरहाल, थन्नामंडी, कोटरंका, मंजाकोट आदि क्षेत्रों में शनिवार की बारिश और ओलावृष्टि ने जहां एक तरफ काफी ठंड बढ़ा दी है तो वहीं दूसरी तरफ लोगों की परेशानियों में भी काफी इजाफा हुआ है।
विशेष कर बाढ़ से बेघर हुए लोगों की नींद तक उड़ने लगी है। पहाड़ी क्षेत्रों में सैकड़ों परिवार अभी भी खुले आसमान के नीचे टेंट लगा कर या फिर किसी स्कूल के भवन में रह रहे हैं। बारिश और ओले गिरने के बाद काफी अधिक ठंड होने की बात कहते हुए कोटरंका के सरपंच मनीर मिर्जा ने बताया कि अभी तक लोग बाढ़ के सदमे से पूरी तरह निकले भी नहीं हैं और ताजा बारिश ने बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें और भी बढ़ा दी हैं।
थन्नामंडी के मनयाल गली के सरपंच मोहम्मद अब्दुल्ला के अनुसार, बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए यह बारिश और परेशानियां लेकर आई है। खुले आसमान के नीचे टेंट लगा कर रहने वाले पीड़ित परिवारों के लिए ठंड को सहन करना अभी से असंभव हो रहा है। आगे भीषण सर्दी होने की बात सोच कर ही लोग सहम जा रहे हैं। ऐसा ही कहना बुद्धल के सरपंच बदर दीन मलिक और कोटरंका तहसील के लड़कोती गांव के सरपंच शोकत अहमद का भी है।