- प्रदेश में कुल 550 बसें, श्रीनगर में 250 रूटों में से 130 चल रहे, जम्मू में 120 में से 50 रूट बंद
- ग्रामीण इलाकों में लोग निजी वाहनों के सहारे, बंद रूटों को बहाल करने के लिए चाहिए अतिरिक्त बसें
सतीश वालिया
जम्मू। जम्मू-कश्मीर सड़क परिवहन निगम (जेकेआरटीसी) की बसों का खर्चा आय से ज्यादा है। हालत यह है कि रूटों पर बसें दौड़ाना मुश्किल होता जा रहा है। घाटे के कारण आधे से ज्यादा रूट बंद कर दिए गए हैं। लंबी दूरी के रूटों पर भी बसें दूसरे राज्यों में भेजने पर खर्च ज्यादा हो रहा है। इस कारण निगम का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में जेकेआरटीसी के पास कुल 550 बसें हैं। इनमें कश्मीर घाटी में 130 रूटों पर बसें चल रही हैं। पहले यहां 250 रूटों पर बसें चलती थीं। इसी तरह जम्मू में 120 की जगह 70 रूट ही चल रहे हैं। यानी 50 रूटों पर बसें नहीं चल रही हैं। इसके अलावा 100 बसें लांग रूट पर जा रही हैं।
ग्रामीण इलाकों में हालत यह है कि मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए या तो पैदल चलना पड़ता है या फिर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों को सफर करना काफी महंगा साबित हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में निजी परिवहन सेवा भी नाममात्र है। लोगों को छोटे वाहनों के माध्यम से गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। जम्मू-कश्मीर सड़क परिवहन निगम के अनुसार, बसें तो रूटों पर पहले भेजी जा रही थीं, लेकिन लगातार घाटा होने के कारण बसें बंद कर दी गईं हैं। अगर जम्मू शहर की बात की जाए तो बस स्टैंड से जानीपुर, अखनूर, दोमाना, आरएस पुरा, बाड़ी ब्राह्मणा के लिए चार से पांच घंटे के बाद सरकारी बस सेवा है।
हालांकि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल में बस सेवा दूसरे प्रदेशों सहित ग्रामीण इलाकों को भी कवर कर रही है। जेकेआरटसी के बेड़े में 550 बसें हैं, जबकि हिमाचल में पांच हजार से ज्यादा बसें हैं। जबकि पंजाब में 12 हजार से ज्यादा बसें चल रही हैं। लोग निजी बसों के बजाय सफर सरकारी बसों में ही कर रहे हैं।
-
वर्ष कमाई खर्चा
2021 14 करोड़ 38 करोड़
2022 16 करोड़ 39 करोड़
2023 19 करोड़ 40 करोड़
2024 24 करोड़ 44 करोड़
-
50 ट्रकों के साथ शुरू कारपोरेशन के पास अभी तक 550 बसें ही
1947 में गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग के रूप में 50 ट्रक चलते थे। 1976 में रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन का गठन हुआ। इसमें 50 से ज्यादा बसें और ट्रक शामिल थे। इसके बाद से लेकर अभी तक सिर्फ बसें 550 ही हैं, जबकि ट्रक भी 500 के करीब हैं। घाटे के कारण निगम के बेड़े में बसों का इजाफा नहीं हो पाया है।
-
300 बसों की और जरूरत
हर बार प्रस्ताव हो रहे नामंजूर
निगम को तमाम रूटों पर बसें चलाने के लिए मौजूदा समय में 300 के करीब बसें चाहिए। 2000 में दो सौ बसों के लिए प्रस्ताव भेजा गया तो उसे हरी झंडी नहीं मिली। इसके बाद 2022 में भी प्रस्ताव भेजा गया। इसको भी मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। ऐसे में बसें अधिकांश रूटों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
कोट
जम्मू-कश्मीर सड़क परिवहन निगम का घाटा आय से ज्यादा है। इसे पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जो रूट बंद हैं, इन्हें दोबारा बहाल किया जाएगा। अतिरिक्त बसों के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
- राकेश सरागंल, एमडी, जेकेआरटीसी
अंबाला सिटी के मां महाकाली दुखभंजनी मंदिर हाल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते कथा