पुंछ जिले में सैन्य काफिले पर हमले को अंजाम देने वाले दो आतंकी दल थे। इनमें से एक ने सेना के ट्रक को घेर लिया और दूसरे दल ने ट्रक के आगे जा रही जिप्सी पर हमला किया। दोनों में सात आतंकी थे। ट्रक पर फायरिंग करने वाले दल में चार आतंकी थे और जिप्सी पर हमला करने वाले तीन दहशतगर्द थे। जिप्सी में चारों जवान बलिदान हो गए।
दरअसल, पुंछ जिले के सावनी इलाके में सैन्य वाहनों पर हमला करने वाले आतंकी सड़क किनारे खड़े थे। सैन्य वाहन में सवार जवानों ने समझा कि बकरी चराने वाले इलाके के लोग होंगे। इसी गफलत में इतना बड़ा हमला हो गया। यह खुलासा हमले में बचे घायल एक जवान ने की है।
घायल जवान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाटादूड़िया में 20 अप्रैल को हमले के बाद से सेना की ओर से पूरे इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। लगातार इलाके में कांबिंग जारी है। उन्होंने बताया कि दो वाहनों के साथ अन्य जवानों को तलाशी अभियान वाले इलाके में लाया जा रहा था। तभी सावनी इलाके में लोग सड़क किनारे खड़े दिखे।
वाहन के नजदीक पहुंचते ही उन्होंने ग्रेनेड हमला किया। अचानक हुए हमले से जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला तभी उन्होंने वाहनों को घेरकर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दी। हालांकि, वाहन में सवार जवानों की ओर से भी फायरिंग की गई। सूत्रों ने बताया कि हमले में दो पोर्टर भी घायल हुए हैं।
चारों तरफ बिखरा था खून ही खून
घटनास्थल पर चारों ओर खून फैला था। इसके साथ ही जवानों के टूटे हेलमेट और दोनों सैन्य वाहनों के टूटे शीशे बिखरे पड़े हैं।
रिहायशी इलाकों से हट कर जंगलों में हमले कर रहे आतंकी
पाकिस्तान परस्त आतंकियों ने कुछ समय से अपनी रणनीति में भारी बदलाव लाया है। आतंकवाद के दौर में आतंकी रिहायशी क्षेत्र के आसपास से सुरक्षा बलों पर हमले करते थे। वहीं, अब आतंकी रिहायशी इलाकों से हटकर सुनसान और जंगली इलाकों में सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं। इसका जीता जागता प्रमाण है कि वीरवार को सुरनकोट तहसील के देहरा गली क्षेत्र के सावनी गली में आतंकियों द्वारा दो सैन्य वाहनों पर हमला किया गया।
इससे पूर्व भी आतंकियों ने भाटादूड़ियां और चमरेड़ में इसी प्रकार रिहायशी क्षेत्र से दूर जंगली और सुनसान क्षेत्र में ही सुरक्षा बलों को निशाना बनाया था। सूत्रों के अनुसार पहले आतंकी इलाकों में इस प्रकार के हमलों को अंजाम देकर अपनी जान बचाने के लिए घरों में घुस जाते थे। लेकिन, अब आतंकवादियों सुनसान और जंगली क्षेत्रों में इस प्रकार के हमलों को अंजाम देकर खुद को जंगलों में ही छुपा रहे हैं। क्योंकि, दो-ढाई वर्षों से उस पार से आने वाले अधिकतर आतंकी जंगली क्षेत्रों में रहने, छुपने और समय बिताने में काफी माहिर हैं। उन्हें इसी प्रकार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे अपना अधिकतर समय जंगलों में बिता सकें।
पुंछ में घात लगाकर सैन्य वाहनों पर हमला
आपको बता दें कि पुंछ जिले के बफलियाज इलाके के सावनी क्षेत्र में वीरवार की शाम आतंकियों के घात लगाकर दो सैन्य वाहनों पर किए गए हमले में पांच जवान बलिदान हो गए, जबकि दो जवान घायल भी हुए हैं। दहशतगर्दों ने पहले ग्रेनेड दागे, फिर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। हमले के तत्काल बाद जवानों ने मोर्चा संभालते हुए मुंहतोड़ जवाब दिया।
इससे मुठभेड़ जारी है। घटना राजोरी-थन्नामंडी-सुरनकोट रोड पर सावनी इलाके में शाम करीब 3.45 बजे की है। बताते हैं कि डेरा गली से बफलियाज की ओर से 48 राष्ट्रीय राइफल्स के दो वाहन आ रहे थे। इनमें एक जिप्सी तथा दूसरा ट्रक था। राजोरी-थन्नामंडी-सुरनकोट रोड पर सावनी इलाके में पहले से घात लगाए आतंकियों ने सैन्य वाहन देखते ही पहले ग्रेनेड दागा।
इससे दोनों वाहनों के रुकते ही आतंकियों ने चारों ओर से घेरकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों की संख्या चार से छह बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सैन्य वाहन से बफलियाज इलाके से जवानों को लाया जा रहा था जहां बुधवार रात से घेराबंदी एवं तलाशी अभियान चल रहा था। जम्मू में सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि खुफिया सूचना के आधार पर बुधवार रात संयुक्त तलाशी अभियान चलाया गया था।
आतंकियों से वीरवार की शाम संपर्क स्थापित होने के बाद मुठभेड़ जारी है। अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर भेजा गया है। हमले के तत्काल बाद पूरे इलाके को सेना ने घेर लिया। अतिरिक्त बल ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया है। सूचना मिलते ही सेना तथा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए हैं। रात होने के बाद भी पूरे इलाके को घेर रखा गया है ताकि दहशतगर्द मौके से भाग न निकलें।
थन्नामंडी, डीकेजी, दरहाल और मंजाकोट के जंगलों को खंगाल रहे सुरक्षाबल
पुंछ के सुरनकोट थाने के अंतर्गत दोनाड़ सावनी क्षेत्र में वीरवार शाम को आतंकवादियों द्वारा घात लगाकर सेना की गाड़ी पर हमला करने के बाद राजोरी के जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया गया है। सूत्रों के अनुसार वैसे तो काफी दिनों से राजोरी के कई जंगली इलाकों में तलाशी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन, सुरनकोट के दोनाड़ क्षेत्र में हुए आतंकी हमले के बाद सेना काफी अलर्ट मोड पर है।
इसलिए, राजोरी के थन्नामंडी, डीकेजी, दरहाल और मंजाकोट के जंगलों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया है। इसमें सेना के पैरा कमांडो, सीआरपीएफ, पुलिस के जवान संयुक्त रूप से तलाशी जंगलों को खंगाल रहे हैं। ड्रोन और खोजी कुत्तों की भी मदद ली जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक थन्नामंडी के डीकेजी के जंगलों को सेना के पैरा कमांडो और सेना की राष्ट्रीय राइफल बटालियन के जवानों ने चारों ओर से घेर लिया है। डीकेजी से लगते मंजाकोट और दरहाल के जंगलों के आसपास भी घेराबंदी कर दी गई है, ताकि पुंछ के दोनाड़ क्षेत्र में आतंकी हमले करने वाले आतंकी भाग न सकें, और उन्हें जल्द ढेर किया जाए। लेकिन, फिलहाल कुछ सफलता नहीं मिली है।
साथियों की आंखों में आंसू और दिल में आक्रोश
पुंछ जिले की सुरनकोट तहसील के देहरा गली के सावनी गली में आतंकियों द्वारा दो सैन्य वाहनों पर घात लगाकर किए हमले में घायल और बलिदान जवानों के साथियों की आंखों में आंसू और दिलों में भारी आक्रोश है। हर एक जवान के दिल में यही बात है कि कब उन आतंकियों से उनका सामना हो और वह अपनी बंदूक की गोलियां उनके सीने के आर-पार कर अपने साथियों का बदला लें।
आतंकी हमले के बाद सेवा की 48आरआर के जवानों के दिलों में गम का यह आलम है कि आज किसी भी जवान ने रात का खाना तक नहीं खाया। देर रात को देहरा गली-बफलियाज मार्ग पर नाका लगाकर ड्यूटी देते हुए, साथियों की बातें याद करते हुए एक-दूसरे से कहते हैं कि काश उनमें से कोई आतंकी इस तरफ आ जाए तो उसे 72 हूरों के पास पहुंचा दें।