दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में वीरवार शाम मुठभेड़ में पूर्व सरपंच सज्जाद मलिक की मौत पर बवाल शुरू हो गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर और अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) प्रमुख इंजीनियर रशीद को डोरू जाने से रोक दिया गया। कांग्रेस, नेकां सहित विपक्ष ने मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग की है।
सज्जाद के परिवार वालों ने भी सियासी दबाव के बीच फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाया है। बवाल की आशंका के चलते जिले में सख्त पाबंदियां लागू कर दी गईं थीं।
पुलिस की ओर से शुक्रवार को मुठभेड़ के संबंध में जारी औपचारिक बयान में कहा गया है कि वीरवार शाम 5:20 बजे सज्जाद मलिक डोरू थाने से एक एके-47 राइफल और मैगजीन लेकर फरार हो गया। कुछ दूर बाजार में पहुंचने पर उसने कुछ राउंड फायरिंग की और अंधेरे का फायदा उठाकर जमलगाम गांव की ओर भागा।
चेरीकारी गांव के पास उसने सेना की पेट्रोलिंग पार्टी पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। पुलिस के अनुसार वह पूर्व आतंकी था। कई थानों में आतंकी गतिविधियों में गिरफ्तार किया जा चुका था। सैन्य प्रवक्ता ने भी उसे आतंकी बताया था।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर ने कहा कि डोरू के अगानू गांव के सज्जाद अहमद मलिक की मौत की जांच सरकार हाईकोर्ट के न्यायाधीश से करवाए। पीडीपी को इस मौत का जवाब देना पड़ेगा। डोरू जाने की सरकार ने अनुमति न देकर यह बता दिया है कि वह किस कदर भेद खुलने के डर से भयभीत है।
सज्जाद के परिवार वालों का कहना है कि उसे थाने से निकालकर एनकाउंटर किया गया है। सज्जाद की पत्नी शबरोजा बेगम ने बताया कि वह उससे मुलाकात करने गई थी, उस समय वह ठीक था।
उसने कहा कि आप अच्छे से घर पहुंचो, मुझे भी छोड़ देंगे। मैं घर पहुंची ही थी कि खबर मिली कि वह मारा गया। सज्जाद के साले तौकीर अहमद वानी के अनुसार 10-15 दिन पूर्व उसकी जमानत का आर्डर कोर्ट से लाया था। इसके बावजूद उसे रिहा नहीं किया गया।