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Jammu News: कनक मंडी वाली भाजपा जम्मू की सिरमौर, निगाहें कश्मीर पर

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- शहरों में शुरु से थी मजबूत पकड़, मोदी फैक्टर ने दिलाई अब तक की सबसे बडी कामयाबी
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कभी कनक मंडी की पार्टी कही जाने वाली भाजपा अब जम्मू संभाग में सबसे ताकतबर पार्टी बन गई है। बीते विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपना अब तक सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 38 में से 29 सीटें जीती हैं। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में करीब 26 फीसदी वोट हासिल किया, जो सत्ताधारी दल से भी ज्यादा है। भाजपा के पास विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसा महत्वपूर्ण पद भी है। इस सबके वाबजूद भी भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती कश्मीर है।

बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कश्मीर की जम्मू की सभी 43 सीटों पर प्रत्याशी उतारे तो, कश्मीर घाटी की भी 19 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे। जम्मू में तो भाजपा को अभूतपूर्व सफलता मिली, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी कश्मीर में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सकी। गुरेज जैसे कुछ सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। भाजपा भी इसको लेकर बड़े पैमाने पर काम कर रही है। पार्टी ने पहली बार कश्मीर में संगठन की नियुक्तियां की। पीमए मोदी सहित भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी जम्मू-कश्मीर की यात्राएं करता रहता है। खुद पीएम मोदी कई बार मन की बात में भी कश्मीर का जिक्र कर चुके हैं। कश्मीर में जी20 समिट करवाने के बाद योग दिवस भी पीएम मोदी ने कश्मीर में ही मनाया। श्रीनगर में रेल पहुंचाना भी कश्मीरियों को खुश करने की कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। इसके बाद भी कश्मीर में भाजपा के लिए माहौल प्रतिकूल नहीं दिखाई दे रहा। दूसरी तरफ गुज्जर-बकरवाल और पहाड़ी समुदाय से भी भाजपा को अपेक्षित वोट नहीं मिला।
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कश्मीरियों के दिलों में बनानी होगी जगह
बीते विधानसभा चुनाव में जम्मू संभाग और हिन्दू बाहुल्य इलाकों में भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा है। हालांकि गुज्जर-बकरवाल और पहाड़ी समुदाय से भाजपा को अपेक्षित जन समर्थन नहीं मिला। कश्मीर में भी भाजपा ने अपनी उपस्तिथि दर्ज कराने की कोशिश तो की, संगठन भी खड़ा कर रही है। फिर भी चुनावी सफलता हासिल करने के लिए कश्मीरियों के दिलों में जगह बनानी होगी। हालांकि भाजपा की राष्ट्रीय नीतियों को देखते हुए ऐसा काफी मुश्किल है।
अश्वनी कुमार
वरिष्ठ पत्रकार

शहरी इलाकों की पार्टी का मिथक टूटा
एक समय पर भाजपा को सिर्फ व्यापारियों और शहरी इलाकों की पार्टी माना जाता था। 2014 के बाद यह मिथक टूट गया। बीते विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने पुंछ, राजोरी और कश्मीर के कुछ इलाकों में अच्छा प्रदर्शन भी किया। आगे भी इस प्रदर्शन को दोहराने के लिए हिंदुओं के अलावा दूसरे वर्गों को भी साधना होगा। फिलहाल भाजपा के सामने गुज्जर-बकरवाल और पहाड़ी वोटरों को अपने पक्ष में लामबंद करना भी बड़ी चुनौती है।
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दिनेश मेहरोत्रा
वरिष्ठ पत्रकार

मुस्लिमों का वोट मिलना नहीं आसान
प्रदेश का राजनीतिक समीकरण ही भाजपा के सभी बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ सालों में एनसी और पीडीपी ने जिस तरह की राजनीति की है, उससे हिन्दू और मुस्लिम दो धड़ों में बंट गए हैं। भाजपा के लिए मुस्लिमों का वोट हासिल करना बेहद मुश्किल है।
प्रोफेसर हरिओम
राजनीतिक विश्लेषक
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