जम्मू। पनुन कश्मीर के संयोजक डाॅ. अग्निशेखर ने कुछ कश्मीरी पंडितों के संगठनों और हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के साथ बैठक का विरोध किया है। उनका कहना है कि ये लोग कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार, उनके हितों को नकारने का काम कर रहे हैं। कश्मीरी पंडितों की कश्मीर में वापसी को लेकर जो भी इस बैठक में निर्णय लिए गए हैं, वे स्वीकार नहीं हैं। डॉ. अग्निशेखर ने कहा कि हाल में ही दिल्ली में मीरवाइज उमर फारूक के साथ कश्मीरी पंडितों के एक दल की बैठक हुई थी। इसको सुलह का नाम देकर प्रचारित किया जा रहा है। 1990 के दशक में जिस तरह कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया था, उसे नजर अंदाज करने की यह साजिश है। यह किसी खतरे के संकेत से कम नहीं है। पनुन कश्मीर के संयोजक ने कहा कि 35 वर्ष का निर्वासन झेल रहे कश्मीरी पंडितों के साथ अब तक न्याय नहीं हो सका है। संगठन ने पूर्व में इस नरसंहार की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच आयोग गठित करने की मांग की थी, जिस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसी अलगाववादी ताकतों के साथ सुलह की बात कैसे की जा सकती है। जब तक कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास व सुरक्षित कश्मीर वापसी की गांरटी नहीं दी जाती तक कोई दिखावटी सुलह का फार्मूला कश्मीरी पंडित स्वीकार नहीं करेंगे। पनुन कश्मीर के सात लाख कश्मीरी पंडितों के लिए केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति के साथ अलग तन बनाने की मांग के लिए प्रतिबद्ध है।