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Jammu News: दक्षिण कश्मीर में कई जमात नेताओं सहित अलगाववादियों ने भरा नामांकन

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अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के कई पूर्व सदस्यों ने मंगलवार को निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किए। तिहाड़ जेल में बंद अलगाववादी कार्यकर्ता सर्जन बरकती की बेटी सुगरा बरकती ने पिता की ओर से नामांकन पत्र दाखिल किया। बरकती 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की हत्या के बाद हुई उथल-पुथल के दौरान प्रमुखता से उभरे थे शोपियां जिले से चुनाव लड़ेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उस पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण जमात चुनाव में भाग नहीं ले सकती है, लेकिन प्रतिबंध हटाए जाने पर उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव में भाग लेने की इच्छा जताई थी। जमात ने 1987 के बाद किसी भी चुनाव में भाग नहीं लिया और 1993 से 2003 तक 10 वर्षों तक अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का हिस्सा रहा, जिसने चुनाव बहिष्कार की वकालत की।



जमात के पूर्व अमीर (प्रमुख) तलत मजीद ने पुलवामा से निर्दलीय के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया। मजीद ने कहा कि 2008 के बाद से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य पर विचार करने के बाद उन्हें पिछली कुछ कठोरताओं से दूर रहने की जरूरत महसूस हुई। 2014 से ही अपने विचार खुलकर व्यक्त कर रहा हूं और आज भी मैं उस एजेंडे को आगे बढ़ा रहा हूं। कश्मीरियों के रूप में हमें वर्तमान में रहना चाहिए और बेहतर भविष्य की ओर देखना चाहिए।
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जमात के एक अन्य पूर्व नेता सयार अहमद रेशी भी कुलगाम से चुनाव लड़ रहे हैं। रेशी ने लोगों से अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने की अपील की। रेशी ने यह स्वीकार करते हुए कि युवाओं को खेलों से परिचित कराकर उन्हें हिंसा से दूर कर दिया है। युवाओं को नौकरियों की जरूरत है। बुजुर्गों को 1000 रुपये से 2000 रुपये की अल्प वृद्धावस्था पेंशन के लिए दर-दर भटकना पड़ता है।
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