विधानसभा चुनाव में अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस में बड़े स्तर पर फेरबदल लगभग तय है। पार्टी की तथ्य जांच समिति अब जिलों में पहुंचकर हार के कारणों का पता लगा रही है। समिति के सदस्यों ने रविवार को रियासी और उधमपुर जिलों का दौरा कर पार्टी प्रत्याशियों, नेताओं, जिला और ब्लॉक पदाधिकारियों के अलावा फ्रंटल विंग के नेताओं से बातचीत की।
पार्टी के वरिष्ठ नेता रवींद्र शर्मा और समिति के अन्य सदस्यों ने संबंधित जिलों में दौरों के दौरान पार्टी के लोगों से रिकॉर्ड बेरोजगारी, अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि, भारी करों और केंद्र व एलजी प्रशासन के अन्य जनविरोधी फैसलों पर भाजपा के खिलाफ बड़े पैमाने पर नाराजगी के बावजूद पार्टी की हार के बारे में पता लगाने की कोशिश की। उन्होंने चुनावों के अपने विचार और अनुभव साझा किए तथा संगठन को मजबूत करने और भाजपा के दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए आगे का रास्ता सुझाया।
कार्यकर्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि पार्टी पिछले चुनावों की तुलना में अभी भी मजबूत है तथा यदि सुधारात्मक उपाय किए जाएं तो यह और भी मजबूत होकर भाजपा का मुकाबला कर सकती है। कहा, लोगों को कांग्रेस पार्टी से बहुत उम्मीदें हैं, जो क्षेत्र में एकमात्र धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकत है।
उन्होंने प्रशासन की पक्षपातपूर्ण भूमिका अपनाने के आरोप लगाए। मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अवैध ढंग से राशन, शराब और धन आदि का वितरण किया गया। भाजपा ने जीत का प्रबंधन करने के लिए प्रचार और चुनावों पर भारी राशि खर्च की। रियासी जिले से उपस्थित प्रमुख लोगों में पार्टी उम्मीदवार भूपेंद्र सिंह, मुमताज खान पूर्व विधायक, राजेश सदोत्रा, राकेश वजीर आदि, उधमपुर में विनोद खजूरिया, सुमित मंगोत्रा, मूल राज भगत आदि मौजूद रहे। समिति के सदस्यों में वेद महाजन, जहांगीर मीर, नरेश गुप्ता और दीनानाथ भगत शामिल रहे।