जम्मू। जेकेसीए घोटाले में पार्टी प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला की संपत्ति जब्त किए जाने से विपक्ष आक्रामक है। हालांकि, पीडीपी ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है। भाजपा तथा अन्य समान विचार वाले संगठनों का मानना है कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के मजबूत इरादे को दर्शाता है। यह सब अनुच्छेद 370 हटने के बाद ही संभव हो पाया है।
नेकां के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ईडी ने राजनीतिक प्रतिशोध से पार्टी अध्यक्ष व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला की संपत्ति को अटैच करने का काम किया है। संपत्ति की कुर्की के आदेश को सही ठहराने लायक कोई सबूत नहीं है। इन पैतृक संपत्तियों को दशकों पहले अधिग्रहित किया गया था और इसका कोई औचित्य नहीं है कि इन्हें क्यों अटैच किया जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध के अलावा कुछ नहीं है। इससे भाजपा की हताशा का पता चलता है जो अपनी एजेंसियों का उपयोग राजनीतिक पैठ बनाने के लिए कर रही है। डॉ. फारूक के खिलाफ अचानक यह कदम इस आधार पर ध्यान हटाने के लिए उठाया गया है कि भाजपा जम्मू कश्मीर में हारती दिख रही है। संयुक्त बयान देने वालों में पार्टी नेताओं में अली मोहम्मद सागर, नासिर असलम वानी, देवेंद्र सिंह राणा, मोहम्मद शफी उड़ी, चौधरी मोहम्मद रमजान आदि शामिल हैं।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रवींद्र शर्मा ने कहा कि कांग्रेस कभी भी किसी कानूनी कार्रवाई में रुकावट नहीं बनी है, लेकिन ऐसी कोई भी कार्रवाई बदले की भावना से नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीन घोटाले के मामलों में भाजपा के कई बड़े नेता चर्चा में हैं, ऐसे में कानून सबके लिए एक जैसा होना चाहिए। अगर किसी मामले में आरोपी देश से भागने या कानून को सहयोग नहीं करने का काम कर रहा है, तो उसकी संपत्ति अटैच हो सकती है। लेकिन जो व्यक्ति पूरा सहयोग कर रहा है, तो ऐसे मामले में देखना चाहिए।
माकपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक एमवाई तारिगामी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देशभर में असंतोष और असहमति को खत्म करने के लिए की जा रही बदले की राजनीति के तहत नेकां अध्यक्ष की संपत्ति को जब्त किया गया है। यह और कुछ नहीं बल्कि एक राजनीतिक प्रतिशोध है क्योंकि भाजपा सरकार हाल में संपन्न जिला विकास परिषद चुनावों में गुपकार गठबंधन को मिले लोगों के समर्थन से हतोत्साहित है। यह देशभर की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ताकतों के लिए भाजपा सरकार की इस तरह की कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाने का समय है।
फारूक की संपत्ति पर जारी हो श्वेत पत्र
जम्मू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रो. हरि ओम का कहना है कि यह 370 हटने से ही संभव हो सका है। फारूक पर हाथ डालना इतना आसान नहीं था। इतनी कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि फारूक की संपत्ति को लेकर श्वेत पत्र जारी होना चाहिए। उनके बैंक खाते सीज होने चाहिए। साथ ही पासपोर्ट जब्त किया जाना चाहिए।