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केंद्र जम्मू-कश्मीर की बीमारी खोजे, फिर करे इलाज-उमर

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जम्मू। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला अनुच्छेद 370 हटने के बाद से हुए बदलावों से बेहद नाराज व आहत हैं। 370 को सारे फसादों की जड़ बताकर सब्जबाग दिखाने की केंद्र की कोशिशों को वे खोखला बताते हैं। 370 की बहाली के लिए बने गुपकार गठबंधन को गद्दारों का संगठन बताए जाने पर भाजपा को चुनौती भी देते हैं। कहते हैं कि केंद्र जम्मू-कश्मीर की बीमारी खोजे, फिर उसका इलाज करे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत के फार्मूले को दरकिनार करने से बात नहीं बनेगी। राज्य के हालात, राजनीतिक प्रक्रिया, उप राज्यपाल प्रशासन के कामकाज और गठबंधन बनाए जाने की जरूरतों समेत सभी पहलुओं पर उन्होंने खुलकर जवाब दिया। पेश है बृजेश कुमार सिंह से विशेष बातचीत-
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राज्य के हालात और हुए बदतर
केंद्र सरकार ने सभी प्रकार की परिस्थितियों के लिए अनुच्छेद 370 को जिम्मेदार ठहराकर इसे हटाया था। कहा था कि अब यहां विकास होगा, अलगाववाद तथा आतंकवाद का खात्मा होगा। राज्य के हालात की पिछले कई सालों से तुलना की जाए तो यह सबसे खराब है। कोई ऐसा दिन नहीं है जब खूनखराबा न होता हो। युवा मुख्यधारा छोड़कर बंदूक उठाने को बाध्य हो रहा है। आतंकवाद पहले से बढ़ गया है। यदि 370 को ही सभी बीमारियों की जड़ मान रहे थे तो कौन सा इलाज किया, जिससे सभी बीमारियां खत्म हो गईं। कश्मीर तो नहीं चाहता था कि 370 हटे, लेकिन जम्मू में 370 हटने के बाद पटाखे छोड़ने वाला भी अब पछता रहा है। दरअसल भाजपा सब कुछ प्रोपेगेंडा के बल पर चलाना चाहती है जो चलने वाला नहीं है। 370 की बात करने वालों को कह दिया जाता है कि वह पाकिस्तान परस्त तथा देश विरोधी है।
हमारी तबाही से आपकी बेहतरी होती तो मान लेते
कश्मीर की समस्या को समझना होगा। बीमारी को खोजकर उसका इलाज करना होगा। अपनी मर्जी से इलाज चलाने से लाभ होने वाला नहीं है। कोरोना और कैंसर का घालमेल बंद करना होगा। इससे न तो कोरोना ठीक होगा और न ही कैंसर। बल्कि इस घालमेल से इंफेक्शन बढ़ जाएगा। यही हाल जम्मू-कश्मीर का हो गया है। इंफेक्शन बढ़ गया है। इससे नाराजगी बढ़ी है। मुख्यधारा की पार्टियों को बिल्कुल किनारे कर दिया गया है। हम किसी खाते में ही नहीं हैं तो बात कहां से आगे बढ़ेगी। सामाजिक ढांचा बिल्कुल तहस नहस हो गया है। हालात यह हो गई है कि अब कश्मीर में लोग न तो राजनीतिक दलों के पास जा रहे हैं और न प्रशासन के पास। पहले यह मानना होगा कि दवा गलत थी, तभी इलाज हो पाएगा। बुनियादी मसले हल करने होंगे। 370 हटने के बाद हमारी तबाही से आपकी बेहतरी होती तो मान लेते लेकिन इसके बाद एक-एक कर सभी राज्यों में हुए चुनावों में आपको हार का सामना करना पड़ा।
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कोई तो समझाए 370 की बहाली की बात करना कैसे है देश विरोध
370 की बहाली की बात करना कहां से देश विरोध है, कोई तो यह समझाए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ना कहां से देश विरोध है। यदि ऐसा ही है तो सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे तमाम लोगों को देशविरोधी मान लिया जाना चाहिए। हम तो केवल संघीय ढांचे की बहाली की बात कर रहे हैं। हम तो केवल इंसाफ मांग रहे हैं।
लोगों के हक के लिए मिलाया हाथ
जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों तथा उनके हक को दोबारा दिलाने के लिए सभी दलों ने गिले शिकवे दूर कर गुपकार गठबंधन का गठन किया है। लद्दाख में भी बेहद समर्थन मिल रहा है। ऐसा नहीं है कि यह केवल कश्मीर के लिए गठबंधन है। समान सोच वाले लोगों से मिलने के कार्यक्रम के तहत ही जम्मू संभाग में गठबंधन की बैठक बुलाई गई। भाजपा भी चाहे तो गठबंधन में उनके शामिल होने का स्वागत है। समान सोच वाला चाहे कोई भी हो, गठबंधन उससे बात करने और हाथ मिलाने को तैयार है।
भाजपा का विरोध गद्दारी नहीं
आज भाजपा के लोग गद्दार कहते हैं। सबसे ज्यादा कुर्बानियां नेकां के लोगों ने दी है। गिनती करा ली जाए, यदि नेकां नंबर एक पर न रही तो वह सियासत छोड़ देंगे। भाजपा का विरोध करने से कोई गद्दार नहीं हो सकता। नेकां गर्व से कहती थी कि आजादी के बाद भारत ने न तो नक्शा बदला और न ही डेमोग्राफी में बदलाव किया। लेकिन अब तो दोनों ही चीजें छिन गईं।
एलजी का काम बेहतर, पर राजभवन के दरवाजे होंगे खोलने
उप राज्यपाल प्रशासन बेहतर काम कर रहा है। खासकर उपराज्यपाल का लोगों से मिलने-जुलने की प्रक्रिया। लेकिन उन्हें अपनी टीम को काम की आदत डालनी होगी। लोकप्रिय सरकार न रहने की वजह से पिछले दो साल से उनकी बंद पड़ी काम करने की आदत बदलनी होगी। जनता के लिए अपने दरवाजे खोलने होंगे ताकि लोग आसानी से अपनी समस्याओं को लेकर उनसे फरियाद लगा सकें और उसका समाधान करा सकें। अभी हाल यह है कि लोग नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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