संवाद न्यूज एजेंसी
आरएस पुरा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को संसद में वित्तीय वर्ष 2022-23 का आम बजट पेश किया। इसको लेकर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी ह। लोगों ने इसे मिलाजुला बताया।
किसान चुनी लाल ने कहा कि उनके पूर्वज भी खेतीबाड़ी करते हैं। वह आज भी कर रहे हैं। केंद्र सरकार को किसानों की बेहतरी के लिए स्वामी डाॅ. रंगनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना चाहिए, पर ऐसा नहीं किया गया। बाजार में वही अनाज किसान बेचते, जिससे अधिक आय मिल पाए। बाजार में मोटे अनाज की कीमत कम होने पर पहले इस पर काम करना चाहिए, ऐसा नहीं किया गया।
जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक के राज्य प्रधान किशोर कुमार ने कहा कि बहुचर्चित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में पिछले साल से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। आवंटन 60, 000 करोड़ रुपये है। अगर सरकार के करीब 12 करोड़ लाभार्थियों के दावे को लिया जाए तो कम से कम 72, 000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने चाहिए थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भी 2022-23 के बजट अनुमान 15,500 करोड़ रुपये की तुलना में इस बजट में केवल 13625 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। हरित क्रांति जिसे पहले कोर योजना के रूप में विज्ञापित किया गया था और 2021-22 में 6,747 करोड़ रुपये का आवंटन था, पिछले और साथ ही वर्तमान बजट में कोई आवंटन नहीं था। 2022-23 के संशोधित अनुमानों में 2,25,000 करोड़ रुपये से उर्वरक सब्सिडी में भारी कटौती की गई है, 2023-24 के बजट अनुमानों में 1,75,000 करोड़ रुपये, 50,000 करोड़ रुपये का 22 प्रतिशत कटौती। इस तरह के कदम से उत्पादकता और खाद्यान्न के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस वर्ष प्राकृतिक खेती के लिए बहुप्रचारित आवंटन 459 करोड़ रुपये है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए आवंटन को 10, 433 करोड़ रुपये से घटाकर 7, 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है। प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना के लिए आवंटन 2022-23 बजट अनुमान के 12,954 करोड़ रुपये से घटाकर वर्तमान बजट में 10,787 करोड़ रुपये कर दिया गया है। बाजार हस्तक्षेप और मूल्य समर्थन योजना के लिए आवंटन जो 2022-23 के संशोधित अनुमानों में 1500 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि बजट में नया कुछ नहीं, मात्र किसान वर्ग की अनदेखी की गई है।
पंच रूचि डोगरा ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा बनाई योजना से विशेष कर ग्रामीण क्षेत्र के लोगो की अनदेखी की गई। बजट में ग्रामीण महिलाओं को 81 लाख स्वयं सहायता समूह में महिलाओं को जोड़ने की बनाई योजना के बजाय, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि वह परिवार को आर्थिक तौर पर सुदृढ़ कर सकें।
युवा दीपक शर्मा ने कहा कि युवा वर्ग की अनदेखी की गई। पहले सरकारी नौकरियों पर रोक लगाए जाने के बाद अब बजट में नया कुछ नहीं रखा गया। रेलवे सेक्टर को पहले ही नजरअंदाज कर रखा है। अब प्राइवेट सेक्टर में पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। सरकार को नए उद्योग स्थापित करने के लिए अधिक राशि रखनी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं किया गया।