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सांबा में विधानसभा सीट बढ़ाने की उठी मांग

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सांबा। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए तैयार है, लेकिन चुनाव से पहले हदबंदी कराने के पक्ष में केंद्र सरकार है। इसको लेकर परिसीमन आयोग प्रदेश के दौरे पर आने वाला है। वह जिला स्तर पर बातचीत कर रिपोर्ट केंद्र को सौंपेगे। इसको लेकर जिले में सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों ने सांबा में विधानसभा की एक नई सीट बनाने की मांग उठाई है।
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सांबा में आबादी अधिक है, ऐसे में जिले में एक नई विधानसभा सीट बनाई जानी चाहिए।
-इंदु जमवाल, पार्षद
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जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी सियासत का ही बोलबाला रहा है। जम्मू की किसी ने खबर नहीं ली, अब समय आ गया है जम्मू संभाग की बात रखने का।
-निलंबर डोगरा, समाजसेवी
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सांबा विधानसभा में एक लाख से अधिक मतदाता हैं। जबकि कश्मीर में 25-30 हजार आबादी पर एक विधानसभा क्षेत्र है। सांबा को एक नई विधानसभा सीट दी जाए।
-कमल भट्टी, समाजसेवी
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जब सांबा को जिले का दर्जा दिया गया तो हीरानगर तहसील के 22 गांवों को जोड़ा गया, इससे क्षेत्र काफी फैल गया है। हम परिसीमन आयोग से सांबा को एक नई विधानसभा की सीट की मांग करते हैं।
-सूरज प्रकाश वर्मा, सरपंच वलेतर, सुंब, सांबा।
अखनूर को बनाया जिला बनाया जाए
विधानसभा सीट में भी की जाए बढ़ोतरी
अखनूर। परिसीमन आयोग की तरफ से जम्मू-कश्मीर में प्रक्रिया शुरू करने पर सीमावर्ती क्षेत्र अखनूर में तीन उप जिला, सात तहसील होने पर क्षेत्र के विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और निजी संगठनों ने विधानसभा सीट की बढ़ोतरी और अखनूर को जिले दर्जा देने की मांग की है।
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भाजपा के नेता और पार्षद करण सिंह ने बताय कि सीमावर्ती अखनूर क्षेत्र में अखनूर और खौड़ विधानसभा की दो सीटों पर दो लाख से भी ज्यादा मतदाता हैं। इसमें में भौगोलिक क्षेत्र भी अधिक है। कई साल से सरकार से मांग की जाती रही है कि क्षेत्र में दो पर तीन विधानसभा सीट बनाई जाए। उन्होंने बताया कि परिसीमन आयोग द्वारा अखनूर के लोगों की जनसंख्या और अधिक क्षेत्रफल होने पर अखनूर को जिले का दर्जा और एक विधानसभा सीट बढ़ाई जाए।
पूर्व सरपंच और पंच देवेंद्र पवार ने बताया कि परिसीमन आयोग द्वारा जम्मू-कश्मीर में प्रक्रिया शुरू करना अच्छा कदम है, जबकि जम्मू से लगातार हो रहा भेदभाव खत्म होगा। समान सीटों का सही सीटों का आवंटन होगा। अखनूर से हो रही लगातार उपेक्षा खत्म होगी। अखनूर और खौड़ की विधानसभा सीट के अलावा एक अन्य सीट बनाई जाए जो जनसंख्या और क्षेत्रफल से बनती भी है।
समाजसेवी अशोक मिश्रा ने बताया कि सीमावर्ती अखनूर क्षेत्र राजोरी, रियासी सहित अधिकतर पाकिस्तान सीमा से सटे हैं। अखनूर और खौड़ विधानसभा सीटों की जनसंख्या कश्मीर घाटी में कई सीटों से जनसंख्या दोगुनी है। जबकि 70 किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। इसलिए अखनूर को जिला और विधानसभा सीट बढ़ाने के लिए अग्रणी है। परिसीमन आयोग को जिले का दर्जा देने के साथ विधानसभा सीट बढ़ाई जाए।
दुकानदार विक्की ने बताया कि अखनूर और खौड़ विधानसभा क्षेत्र के लोगों की मांग है क्षेत्र में एक अतिरिक्त विधानसभा सीट बनाई जाए।
मीरा साहिब को विधानसभा का दर्जा देने की मांग
आरएस पुरा। मीरां साहिब ब्लाक को विधानसभा का दर्जा देने की मांग कई संगठनों व राजनीतिक दलों ने की है। माकपा नेता व पूर्व सरपंच किशोर कुमार का कहना है कि मीरां साहिब क्षेत्र में विकास होना चाहिए था, नहीं हो पाया। उपजिले में पहले आरएस पुरा विधानसभा क्षेत्र के अधीन था बाद में सुचेतगढ़ क्षेत्र को विधानसभा का दर्जा दिया गया। मीरां साहिब की अनदेखी की गई।
जम्मू-कश्मीर पीपुल सेक्युलर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा ने कहा कि आजादी के पूर्व मीरां साहिब में तारपीन कारखाने के साथ क्रिकेट के बल्ले बनाए जाते थे, अब इन्हें बंद कर दिया गया है। क्षेत्र की अनदेखी के चलते यहां कारखाने बंद होने पर सैकड़ों की संख्या में कार्य करने वाले लोग बेघर हो गए।
पूर्व सरपंच गुरचरण सिंह पम्मा ने कहा कि अब समय की मांग है कि मीरां साहिब क्षेत्र को विधानसभा का दर्जा मिलना चाहिए, ताकि यहां अधिक विकास हो। ब्लॉक के अधीन आठ सरकारी हाई स्कूल व कई गैर सरकारी स्कूल हैं, मीरां साहिब में लड़कियों का ही सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल है। बच्चों को दसवीं के बाद आगे की शिक्षा के लिए जम्मू य आरएस पुरा जाना पड़ता है।
आम आदमी पार्टी के जम्मू संभाग के संयोजक ओम प्रकाश खजूरिया का कहना है कि मीरां साहिब क्षेत्र आज भी पिछड़ा है। इसका कारण अनदेखी है। कस्बे के मुख्य बाजार सहित कई गांव की सड़कों की हालत जर्जर है। मीरां साहिब विधानसभा क्षेत्र के अधीन होने पर यहां विकास हो पाएगा। परिसीमन आयोग को चाहिए कि यहां के लोगों की भावनाओं को देखते हुए विधानसभा के अधीन किया जाए।
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