अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर में अब छर्रों से किसी की भी आंखें नहीं छीनी जाती। अब सुनिश्चित किया जा रहा है कि सड़कों पर किसी भी निर्दोष की जान न जाए। लाल चौक के घंटा घर पर शान से तिरंगा लहरा रहा है और यह आतंकवाद से दूर जाने और शांति का प्रतीक है। वीरवार को श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते हुए उपराज्यपाल ने यह बातें कहीं।
इस दौरान उन्होंने कहा कि घाटी के लोग सूफी संत शेख उल आलम की भूमि पर उनका स्वागत करते हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों के कल्याण और शांति के लिए मोदी के समर्पण ने दशकों की उथल-पुथल के बाद क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में हुए परिवर्तन पर प्रकाश डाला। कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कश्मीर के संदर्भ का लगातार उल्लेख किया। उन्होंने विभिन्न मंचों पर लोटस स्टेम (नंदड़ू), पश्मीना और केसर जैसे कश्मीरी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए पीएम की सराहना की। उन्होंने सुरंगों, रिंग रोड फ्लाईओवर, सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार सहित विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की, जिससे पूरे क्षेत्र में पहुंच और कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। उन्होंने व्यावसायिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करते हुए यूरोप के समान श्रीनगर की पोलो व्यू पेडेस्ट्रीयन मार्केट का जिक्र किया। पहाड़ियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने और गुज्जर-बकरवालों की अछूती स्थिति पर जोर देते हुए सिन्हा ने पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में ओबीसी को शामिल करने पर प्रकाश डाला। उन्होंने हजारों सरकारी नौकरियों के सृजन और आठ लाख से अधिक उद्यमियों के उद्भव का उल्लेख किया, जिनमें कई सफल महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह भी शामिल हैं।
उप राज्यपाल ने शोपियां की जाहिदा जैसे स्थानीय उद्यमियों की प्रेरणादायक कहानियां सुनाईं, जिनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच गए हैं। उन्होंने प्रदेश में बढ़ते आर्थिक परिदृश्य को दर्शाते हुए नए स्टार्टअप, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं, मॉल और सिनेमा शृंखलाओं की स्थापना के बारे में भी बताया। उन्होंने हिंसा की कमी घाटी में पर्यटन के बढ़ने की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2022 तक नाइटलाइफ और मल्टीप्लेक्स सिनेमा का कोई कॉन्सेप्ट नहीं था। लेकिन आज युवा झेलम के किनारे गुनगुनाते हुए, श्रीनगर के सिनेमाघरों और नाइट लाइफ का आनंद लेते हुए आम देखा जा सकता है।
दो लाख क्षमता का मैदान होता तो वह भी कश्मीर के लोगों से भरा होता
उप राज्यपाल ने कहा, बख्शी स्टेडियम की क्षमता 35,000 है। इसके अलावा यहां करीब 25,000 कुर्सियां लगाई गईं। जिस तरह से घाटी के लोग प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए हैं, उससे स्टेडियम पूरी तरह से भरा हुआ है। मैं उन लोगों से माफी मांगना चाहता हूं, जिन्हें बैठने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। अगर 2 लाख क्षमता का मैदान होता तो वह भी कश्मीर के लोगों से भरा होता। पीएम के लिए कश्मीर के लोगों का यही प्यार है।