सियाचिन की बर्फीली ऊंचाइयों में जवानों संग दिवाली मनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक तरह से पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। उनके पहुंचने से कुछ देर पहले तक सीमा पर पाकिस्तानी बंदूकें गरज रही थीं। मोदी ने दिवाली के दिन दुनिया की सबसे ऊंची अग्रिम पोस्ट पर रहकर पीएम के रूप में पहली दिवाली जवानों के नाम की।
मोदी ने जवानों को खुद खाना परोसा, हाथ धुलवाए और हाथ मिलाया। उन्होंने कहा कि जवानों के बूते ही देश के सवा सौ करोड़ लोग खुशी-खुशी दिवाली मनाते हैं। चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने वन रैंक वन पेंशन देने के ऐलान पर कहा कि कितने दशक बीत गए लेकिन यह काम उनके ही भाग्य में लिखा था।
नेशनल वार मेमोरियल बनाने के वादे को पूरा करने का भरोसा भी दिया। माइनस तीस-चालीस डिग्री तापक्रम वाली इस पोस्ट की दुर्गम परिस्थितियों का भी जिक्र अपने 13 मिनट के संबोधन में किया। उन्होंने कहा यहां के हालत कोई यहां आए बगैर नहीं समझ सकता। कितने जवान बर्फ में दब गए। शव 21 साल बाद मिल रहे हैं। कुछ परिवारों को अपने सपूतों के लौटने का इंतजार आज भी है।
पीएम ने विजिटर बुक में लिखा भावुक संदेश
पीएम ने विजिटर बुक में लिखा कि जवानों का त्याग ऋषि-मुनियों से कम नहीं है। सियाचिन से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को दिवाली की शुभकामना देकर भावुकता का इजहार भी किया। वह पहले पीएम हैं जो दिवाली के दिन सियाचीन में अपने घरों से दूर दुश्मन की गोलियों से रूबरू जवानों को यह अहसास करा गए कि त्योहार पर याद करने वाला शख्स ही पीएम की कुर्सी पर बैठा है।
मोदी ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद जवान परिवार के साथ गर्व के साथ जीवन बिता सकें, इसकी व्यवस्था हमारी जिम्मेदारी है। सिर्फ सीमा की रक्षा ही नहीं जवान आपदा के वक्त भी राहत में तत्परता के साथ काम करते रहे हैं। अपनी जवानी खपा रहे हैं ताकि देश की जवानी कायम रहे।
दुनिया की सबसे दुर्गम पोस्ट पर पीएम मोदी
सियाचीन के बंजर बर्फीले रेगिस्तान में सेना के तीन हजार जवान तैनात हैं। पाकिस्तान ने जब पर्वतारोहियों का दल भेजकर इस बर्फीली चोटी पर कब्जे की कोशिश की तो जबाव में भारत ने आपरेशन मेघदूत के तहत 1984 में इस चोटी पर कब्जा जमाया था। सियाचीन ग्लेशियर पर भारत अब मजबूत स्थिति में है।
पाकिस्तान की पोस्टें यहां निचले स्थानों पर हैं। यहां दुश्मन का सामना करते जितने जवान शहीद नहीं हुए उससे अधिक ठंड के कारण जान गंवा बैठे। भारत इस पोस्ट पर प्रतिदिन 10 करोड़ रुपये खर्च करता है। जवानों के लिए हेलीकाप्टर से रसद भेजी जाती है। उन्हें बर्फीली सर्दी से बचने के लिए खास जूते और वर्दीं पहनना पड़ता है।