जम्मू कश्मीर में जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत के मूल मंत्र पर आधारित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष पैकेज पर हिंसा का ग्रहण लग गया है। पैकेज के एलान के 9 महीने बाद भी कई प्रोजेक्ट आकार नहीं ले पाए हैं। यूपीए शासनकाल में शुरू किए गए प्रधानमंत्री पुनर्गठन कार्यक्रम के पुराने प्रोजेक्टों की गति भी धीमी पड़ गई है।
इनमें से कई प्रोजेक्टों को पीएम मोदी के पैकेज में शामिल कर नया रूप देने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। बाढ़ से प्रभावित लोगों के पुनर्वास का काम भी अधूरा है। साथ ही कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए प्रस्तावित योजनाएं विवादों में उलझ गईं हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के नए विशेष पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर को 80 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात मिली थी। इनमें नई पहल और परियोजनाओं पर 62,393 करोड़, पीएमआरपी के पुराने प्रोजेक्टों की चालू योजनाओं के लिए 7,427 करोड़, मौजूदा बजट के तहत संचालित होने वाली योजनाओं के लिए 7,263 करोड़ और पीपीपी माडल के तहत सड़कों और राजमार्गों के लिए 2,985 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।