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गर्मी में बिजली पानी की कमी से बेहाल हुआ शहर

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तापमान बढ़ने के साथ ही बिजली-पानी संकट भी गहराने लगा है। जरूरी समय में बिजली के नये कट शुरू होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे पेयजल आपूर्ति पर भी सीधा असर पड़ने लगा है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रियासत की अपनी पनबिजली परियोजनाओं में क्षमता से काफी कम उत्पादन हो पा रहा है।
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कुल 21 पनबिजली परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता 761.96 मेगावाट की है और इन परियोजनाओं में भी कई विभिन्न कारणों से बंद पड़ी है। बिजली खरीदकर भी मांग को पूरा करने में विभाग को 1000 मेगावाट से ज्यादा की कमी पड़ रही है। गर्मी बढ़ने से जरूरी घंटों में ढांचे पर ओवरलोड बढ़ गया है। इसको देखते ही विभाग ने बिजली कटौती को जरूरत के हिसाब से बढ़ा दिया है।

पेयजल की मांग बढ़कर 46 मिलियन गैलन डेली तक पहुंच चुकी है, जबकि उपलब्धता 42.5 मिलियन गैलन प्रतिदिन ही है। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति का पूरा सिस्टम पंपिंग पर आधारित होने की वजह से बिजली न होने पर पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हो जा रही है।
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हालांकि पीएचई मंत्री सुखनंदन कुमार का कहना है कि अगले सीजन से पेयजल आपूर्ति में सुधार लाने के लिए सभी उचित कदम उठाए जाएंगे।

पीएचई डेलीवेजरों की हड़ताल से पेयजल को हाहाकार

संभाग में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग के अस्थायी कर्मचारी (डेलीवेजर) की काम छोड़ हड़ताल वीरवार को दूसरे दिन भी जारी रहने से कई जिलों में पेयजल के लिए हाहाकार मचने लगा है। कठुआ, राजोरी में हड़ताल से पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ा है। जम्मू के अलावा अन्य जिलों में भी आंशिक असर पड़ना शुरू हो गया है।

हड़ताल से पेयजल आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए वीरवार को चीफ इंजीनियर प्रेम नाथ ने हड़ताली कर्मियों से चर्चा की और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी मुलाकात पीएचई मंत्री चौधरी सुखनंदन कुमार से करवाई जाएगी।

आल जेएंडके पीएचई, आईटीआई, सीपी वर्कर्स एसोसिएशन के झंडे तले शुरू हुई काम छोड़ हड़ताल के दूसरे दिन भी जम्मू में बीसी रोड स्थित चीफ इंजीनियर कार्यालय परिसर में डेलीवेजरों का धरना प्रदर्शन जारी रहा।

प्रधान तनवीर हुसेन ने दावा किया कि हड़ताल से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और कठुआ और राजोरी के अलावा जम्मू में मुठ्ठी, सैनिक कालोनी, गांधीनगर आदि इलाकों में पेयजल आपूर्ति पर असर हुआ है। उन्होंने कहा कि जम्मू संभाग में ही पीएचई विभाग में 16070 अस्थायी कर्मचारी वर्षों से काम कर रहे हैं।

ऐसे में अगर उनकी मांगों का हल जल्द न हुआ तो पेयजल आपूर्ति को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया जाएगा और इसकी जिम्मेदारी रियासती सरकार की होगी। इस अवसर पर कुलभूषण सिंह, दीपक, जीवन सिंह आदि ने भी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
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हड़ताल खिंची तो पानी को तरसेंगे

पीएचई विभाग जम्मू के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुनील गुप्ता का कहना है कि अगर डेलीवेजरों की हड़ताल लंबी चलती है तो पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि स्टेशनों पर तोड़-फोड़ न हो, इसके लिए यूनियन के नेताओं को समझाया गया है। विभाग की तरफ से कोशिश की गई है कि उनके मसलों को सरकार तक पहुंचाया जाए।

ड्राइवरों, क्लीनरों का हड़ताल को समर्थन
पीएचई डिपार्टमेंट ड्राइवर्स क्लीनर्स यूनियन जम्मू प्रोविंस ने विभाग में कार्र्यरत सभी तरह के डेलीवेजरों, आईटीआई, नान आईटीआई, कैजुअल और नीड बेस वर्कर्स को नियमित करने की मांग को लेकर डेलीवेजरों की काम छोड़ हड़ताल को समर्थन का ऐलान किया है।

वीरवार को चेयरमैन करतार चंद दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में मांगों को पूरी तरह से जायज बताते हुए सरकार से मांगों को पूरा करने की अपील भी की गई। इस अवसर पर प्रधान ठाकुर मोहन सिंह, महासचिव देवेंद्र सिंह, राज कुमार, तारा चंद, शहीद अली, नरेश शर्मा, तिलक राज, जोगेंद्र सिंह आदि भी मौजूद रहे।
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