जम्मू। कोरोना संक्रमित लोगों की देखभाल में दिन रात काम कर रहे कोरोना वॉरियर्स में फिजियोथेरेपिस्ट तजामुल हुसैन गिरि भी शामिल हैं। जिला अस्पताल रामबन में तजामुल आरएटी और आरटी-पीसीआर दोनों में लगभग 180 कोविड परीक्षण करते हैं। विशेष अभियान के दौरान औसतन और कभी-कभी उन्हें 250 परीक्षण तक करने पड़ जाते हैं। इसमें कोविड संक्रमण के अनुबंध का जोखिम बहुत अधिक होता है, जिससे उनके बच्चों और पत्नी की जान जोखिम में पड़ सकती है।
गिरि ने अपनी दिनचर्या के बारे में कहा कि सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंचने के बाद वह कुछ कागजी काम करते हैं और सैंपलिंग की तैयारी करते हैं। यह सिलसिला शाम चार बजे तक बिना किसी रुकावट के चलता है। फिर शाम को छह से सात बजे घर को निकलने से पहले सैंपल की व्यवस्था करनी होती है। कोडिंग, टैगिंग और पैकिंग के बाद उन्हें सुरक्षित रखना होता है। डॉक्टर और उनके अन्य वरिष्ठ सहयोगियों के साथ मिल कर तजामुल एक टीम के रूप में काम करते हैं। अस्पताल प्रशासन भी उनकी रक्षा करने और उन्हें आवश्यक सुरक्षा सामग्री प्रदान करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। अपने सहयोगियों, कोरोना हेल्थ वॉरियर्स को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सैंपलिंग या टीकाकरण के दौरान निर्धारित दिशा निर्देशों का पालन करने में थोड़ी सी भी लापरवाही एक मरीज की जान ले सकती है, और कई अन्य लोगों को भी जोखिम में डाल सकती है।