आतंकी बुरहान वानी की मौत पर भड़की हिंसा में भी कश्मीरियत ने अपना किरदार नहीं छोड़ा। सुरक्षा बलों पर हमले, अमरनाथ यात्रा पर पथराव और अल्पसंख्यक पंडित कालोनियों को निशाना बनाने की साजिशों के बावजूद कश्मीरियत कमजोर नहीं पड़ी।
कभी अमरनाथ यात्रियों के दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे लोगाें को बचाने की मिसाल सामने आई तो कभी सड़क हादसे से मौत के मुंह में फंसे सेना के जवान को बचाने के लिए कश्मीरियत बेचैन हो उठी।
सौ दिनों की हिंसा के दौरान ऐसे कई लम्हे आए जब उपद्रव और उन्मादी माहौल में भी कश्मीरी अवाम ने अपनी मेहमाननवाजी की पहचान को मिटने नहीं दिया।